बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

तुम सरिता बनकर मिल लेना


ओ चंद्रमुखी चंचल नयना ,
अब और अधिक हमे मत छलना
अंखिया सखिया जब हमसे मिले ,
  हृदय प्रिया कही मत तकना

छवि अंकित थी हृदय मे सदा
,हर एक अदा पर हम थे फिदा
थे प्रणयातुर तेरे नयना,
अब मिलते नही क्यो यदा कदा ?
लिये बाली उमर मटकाये कमर ,
चलो प्रेम डगर तुम सम्हलना।। १।।

सुमधुर मधुर तेरी बाते ,
थे उजले दिन महकी राते
तेरी पायलिया की छम छम ,
सुन दिल तेरे पग पर बिछ जाते
चंपा कि कलि आजा  मेरी गली ,
  औरौ की गली तुम मत चलना ।।२।।

सपनो का धरातल कब होता ,
जीवन तो हकीकत को ढोता
मन पंछी बन नभ मे उडता,
सागर मे लगाता है गोता
सागर मे सरिता बह आई ,
तुम सरिता बनकर मिल लेना ।।३।।

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