रविवार, 26 जून 2011

ओ अषाढ़ के प्यारे बादल

ओ अषाढ़ के प्यारे बादल
भीगने दो धरती का आँचल
शीतल बूंदों की छम छम से
बजने दो खुशियों की पायल ||1||

ग्रीष्म ऋतू की उष्ण हवाए
सबको कर देती घायल
ओ घुंघराले काले बादल
झूम झूम कर बरसा दो जल ||2||

कोकिल की मीठी स्वर लहरी
आमंत्रित करती श्यामल
संवेदना की प्रतिमूर्ति बन
शुष्क जगत को करो तरल ||3||

तेरी चाहत के दम पर ही
जीवित जग की चहल पहल
स्नेह भले ही नभ से रखना
दिखला देना छवि धवल ||4||

शोषक बनकर रवि किरणों ने
सौख लिया पानी निर्मल
सूखी सरिता की रेती के
कण कण में फैला हल-चल ||5||

ओ इन्द्रलोक के रहने वाले
मुक्त हवा संग बहने वाले
बनो नहीं तुम उच्छ्रंख्ल
बन जाओ दुखियो के संबल ||6||

शनिवार, 4 जून 2011

dohe

आसमान अरमानो का फैला हुआ अनंत
पीट रहे है क्रूर हाथ संवेदना के ढोल
सहानुभूति के नाम पर करते रहे मखौल !!१!!
दुष्ट शकुनी संग रहे कलयुगी अर्जुन
कर्मक्षेत्र के दंद्व में जीत गए अवगुण !!२!!
आंसू पिए द्रुपद सुता खुले केश है शेष
,अपमानों के बोझ तले धोती है अवशेष !!३!!
थोड़े गम है खुशिया कम ,प्रश्न खड़े ज्वलंत
आसमान अरमानो का फैला हुआ अनंत !!4!!
लोकतंत्र की आड़ में भीड़ -तंत्र का खेल
बूथ केप्चरिंग जो करे नहीं गए वो जेल !!9!!
महंगाई तो खूब बड़ी मूल्य-नियंत्रण फेल
बने चुनावी शस्त्र अब चावल शक्कर तेल !!10!!
राजनीति व्यापार नहीं कह गए है शेषन
नए चुनाव सुधार से नेता को टेंशन !!11!!
राजनीति से लुप्त हुई अब नीती की बात
सत्ता के संघर्ष में हुए घात -प्रतिघात !!12!!
गुटबाजी के खेल में निर्दलीय है मस्त
परिणाम जब पता लगा हुई जमानत जब्त !!१3!!