मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

किस्मत अब तो उन्ही करो में

कड़े सुरक्षा के घेरो में 
रहे निरंतर जो पहरो में 
छुपी हुई है निष्ठुरता तो,
कुर्सी के कुत्सित चेहरो में 

जटिल प्रक्रियाओ में घिरकर 
मिटी योजनाओ कि स्याही 
संवेदना का स्वांग रच रही 
शोषणकारी नौकरशाही 
कैद हो गई है जनता की 
 किस्मत अब तो उन्ही करो में 

धसे हुए है प्रगति पहिये 
बिकी हुई सम्पूर्ण व्यवस्था 
थकी हुई बेहाल जिंदगी 
ढूंढ  रही खुशहाल अवस्था 
समाधान के सूत्र खोजती 
बीत गई आयु शहरो में 

यश वैभव की ऊँची मीनारे
कलमकार को ललचाये 
चाटुकारिता के हाथो में 
राज्य नियंत्रण रह जाए 
सिमट गए सुख के उजियारे
  उनके ही आँगन कमरो में
 

रविवार, 29 दिसंबर 2013

भक्ति में रहता समर्पण

भक्ति में रहता समर्पण और त्याग में संन्यास है 
भावना का यह सरोवर ,नहीं वाक्य का विन्यास है 

रहता निश्छल ह्रदय में ,भाव से अभिभूत है 

आत्मा होती बैरागन ,मन हुआ अवधूत है 
आस्था है चिर सनातन ,भक्त का विश्वास  है 

 जानता है मानता है ,पर कहा वह सुख है 
राधा जी  रूठी हुई है ,हर ख़ुशी में दुःख है 
भक्ति में शक्ति है रहती और प्रेम में उल्लास है 

राम से होती रामायण, श्रीकृष्ण से संगीत है 
प्यार कि हर हार में ही ,होती ह्रदय की जीत है
भाव भी भींगे हुए है पर बुझ  पायी प्यास है