गुरुवार, 26 जुलाई 2012

कर खेलो से प्यार



खेलो से संसार भरा,कर खेलो से प्यार
जो खेलो से जुडा नही ,जीवन है निस्सार
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ओलम्पिक  के गेम मे ,चला है ऐसा दौर
खिलाडी और कोच चले ,अब लंदन की और

ओलम्पिया  से शुरु ,ओलम्पिक  का गेम
खेलो मे उन्माद रहा ,लग जाये न ब्लेम
ह्रदय में संताप रहे न ,रहे  न कोई शोक
हार जीत से खेल चला है ,मन की ईर्ष्या रोक

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मानवीय सदभावना ,तू खेलो से सीख
यश अपयश तो विधी रहे ,ज्यादा तू न चींख
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आंसू से नदिया भरी ,दुख सागर असीम
रहे खेल की भावना,क्यो होता गमगीन
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नियति मे है खेल भरा ,नियति हाथो खेल
हार जीत सी चली यहाँ ,छुक छुक करती रेल
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खेलो मे भी खेल हुआ ,कैसी रेलम-पेल
खेलो के आयोजन मे ,चले गये वो जेल






मंगलवार, 24 जुलाई 2012

वह खिलाड़ी देश का है

दुर्भाग्य की ही कौख में जो 
पुरुषार्थ का ही बीज बोता
कौन कहता है
वह यहाँ पर 
सुविधाओं में सपने पिरोता  

संघर्ष की जलती है ज्वाला 
संघर्ष में सुध बुध न खोता
मौन रहता वह नहीं है 
नव चेतना तन -मन में बोता 

अभाव में भावो के बल है 
मुश्किलों को देता न्यौता
वह खिलाड़ी देश का है
 निज देश हित आशा संजोता

रविवार, 22 जुलाई 2012

हो स्वप्न अटल निखरा हुआ पल

नवल धवल, पुरुषार्थ प्रबल
खिले लक्ष्य कमल मिलता रहे हल

हर डगर-डगर बढ चले हो चरण
खुशिया करती जीवन का वरण
हो स्वप्न अटल निखरा हुआ पल

जीवन हो मरण,कारण हो करण
शब्दो छन्दो का ,कभी नही हो मरण
हो धरा निर्मल,धरातल समतल

आंधी, अंधड़ नही हो पतझड़
हो घुमड़ घुमड़ बारिश की झड़
खलबली हलचल जीवन हो सफल



शनिवार, 14 जुलाई 2012

सत्य

जिंदगी अफ़सोस मत कर हार से ही जीत मिलती
सत्य की बुनियाद गहरी ,झूठ की बिल्डिंग हिलती

झूठ तो दिखता है चेहरे,सत्य के है अर्थ गहरे
सत्य में ही तथ्य रहता ,तथ्य पर हर तर्क ठहरे
सत्य होता चिर सनातन ,सत्य से आशाये खिलती

सत्य ही तो सूर्य देव ,सूर्य सा जग -मग होता
झूठ के झुकते नयन है ,झूठ ही निर्लज्ज होता 
सत्य सहज वेदना है संवेदना भावो में मिलती

 

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

शिव देते वरदान

सावन मन भावन हुआ ,मन मे उठे विचार
मन का मयुरा नाच रहा,दोहे ले आकार

शिव पूजा से ईश मिले,मिटते मन अवसाद
सत्य सनातन शिव रहे,तज दे भय प्रमाद

निर्झर,नदिया भरे रहे,वन मे रहे बहार
चातक पॅँछी ताक रहा,बूंद ,बारिश,बौछार

वायु मे हुई घनी नमी,मिट्टी देती गन्ध
अमर्यादित हो रहे,नदियो के तटबन्ध

कावडिये के चले चरण,शिव मंदिर की ओर
हे शिव शंभु बांधिये,निर्मल पावन डोर

शिव की कर लो साधना,मात शिवा का ध्यान
सब जीवो मे शिव रहे, शिव देते वरदान


बुधवार, 11 जुलाई 2012

होती नही है वे तरल

ताश पत्तो से है बिखरे,झूठ के ऊँचे महल
सत्य की कुटिया है होती,पंक मे खिलते कमल

हर तरफ बाधाये होती,और समस्याये गहन
गुम होती ख्वाहिशे है,खुशिया रहती है रहन
बस बची है भाग-दौड,अब न बनते है महल

बीन रहे कचरे को बच्चे,पी रहे धीमा जहर
स्वार्थ है बिखरे पड़े ,लोभ से लिपटा शहर
मौन क्यो सम्वेदनाये ? होती नही है वे तरल
 
दूरभाषी सब बने है, सत्यभाषी अब नही  
हर वचन है मूल्यहीन, मिथ्यावादी अब सही
झूठ की ऊँची मीनारे ,झूठ का है बाहुबल

सोमवार, 9 जुलाई 2012

जबाब नपा-तुला है

कमजोर रोशनी हुई
 तो अंधियारा ही ढला है
लगी गरीब की हाय  
क्योकि घर उसका जला है 

सिर्फ दिए जलाने भर से 
दिवाली नहीं होती
सफलता पायी उसी ने 
सीखी जिसने जीने कला है 

रास्ता न्याय का  
सिर्फ उन्हें ही दिखाई देता है 
जिनका चिंतन निर्मल है और ​​​ उजला है

काले कारनामो को 
कितना भी छुपा ले कोई
अंतत न्याय तो 
फरियादी को ही मिला है 

उनके चेहरे पर 
सच्चाई दिखाई नहीं देती है  
पर उनकी भाषा संयमित है
जबाब नपा-तुला है

रविवार, 8 जुलाई 2012

कल की चिंता

सिसकता हुआ आसमान है ,आंसू के प्याले है
तुम्हारी यादो में खोये है ,कहलाये दिलवाले है 

बरसते बादल नहीं , अब बरसती है आँखे
तुम्हारे देह की गंध को, हम आज भी सम्हाले है 

सम्पूर्ण  परिवेश में ,व्याप्त कल की चिंता है 
 
ताजे चिंतन से ही तो, हम हर हल निकाले है 

रोज -रोज आ जाता है ,ख्यालो में कोई
तमन्नाओं के बल पर, वे कहा मिलने वाले है

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

क्या व्यापारी प्यार?


भूखी है और बिलख रही,निर्धनता चहू ओर
सरकारी गोदामो का ,खा गये गेहू ढोर

मूल्य नियंत्रण हुआ नही,मुद्रा होती क्षीण
अब शेयर बाजार मे ,खाता है सिंह त्रण

मन मौजी तो मौज करे,भरे रहे भण्डार
क्यो तू सुख की खोज करे,सुख है तेरे द्वार

खोजा जल पाताल मे ,गहरे है नल कूप
लालच तुझको नही मिली ,संतुष्टि की धूप

रिश्तो का व्यापार हुआ ,क्या व्यापारी प्यार?
लज्जा भी निर्लज्ज हुई,कैसा व्याभिचार



सोमवार, 2 जुलाई 2012

हे गुरु देवो नमो नम :

गुरु शुरू से साथ रहे ,गुरु सत्ता असीम
हे गुरु देवो नमो नम
: ,लघुता कर दे भीम 
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गुरु तत्व चहु खींच रहा ,हो जाओ अब लीन
ज्यो ज्यो उसमे लीन हुआ ,हुआ कुशल प्रवीण 
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गुरु चरणों की आस रही ,प्यासे रहते नैन
दर्शन दो गुरुदेव हमें ,तव दर्शन से चैन 
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आज्ञा प्रज्ञा चक्र है ,भेद सके तो भेद
गुरु बिन ज्ञान नहीं मिला ,पढ़ ले चाहे वेद
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गुरु ज्ञान का रूप है ,गुरु छाँव है धूप
धूप तेज और ओज दे ,छाया मात स्वरूप 
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गुरु आशीष से ईश मिले ,गुरु हाथो तपिश
जप तप करते नहीं मिले ,सद्गुरु है जगदीश 
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गुरु बिन मन व्याकुल रहा ,तन मन
है गुरुकुल
अब
कोई मोल मिले ,गुरु चरणों की धुल 
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गुरु पाये थे राम ने ,गुरु पाये हनुमान
गुरु अर्जुन के द्रोण रहे
,जगदगुरु घनश्याम
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गुरु पूर्णता सींच रहे ,खींच रहे है कान
हे गुरु देवो नमो
: नम तुमसे पाया ज्ञान
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दत्तात्रय गुरु देव हुए ,दे गये अमृत ज्ञान
हर कण में बिखरी हुई ,गुरुता को पहचान 

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गुरुवर विश्वामित्र हुये,गुरुवर रहे वशिष्ठ
गुरु देवो के देव रहे ,दत्त गुरु विशिष्ट

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गुरुवर परशुराम रहे ,बृहस्पति गुरुदेव
लघुता न कभी साथ रहे ,गुरुता संग सदैव