सोमवार, 11 जनवरी 2016

शक्ति या सामर्थ्य

शक्ति जहा व्यक्ति का बाह्य बल है
सामर्थ्य वही व्यक्ति की आंतरिक क्षमता है
शक्ति का अर्थ जहाँ यह दर्शाता है
कि कोई व्यक्ति किसी को कितना पीट सकता है
सामर्थ्य यह प्रकट करता है
कि कोई व्यक्ति कितना सह सकता है
शक्ति जहाँ आक्रामकता है
सामर्थ्य वहा सहिष्णुता है
शक्ति करती जहाँ युध्द क्रीड़ा है
सामर्थ्य में रहती भीतर की पीड़ा है
सागर की लहरे उठ कर ऊपर की लहराती है
तूफान के भीतर सुनामी ले आती है
तब वह शक्ति की अभिव्यक्ति करती
प्रलय मचाती है
सामर्थ्य वह है 
जो सागर की गहराई में रहता
विशाल जल राशि को नापता है
पर्वतो की ऊंचाई और विशालता है
जिसकी  विराटता को देख हृदय काँपता है
सामर्थ्य जहा धारण करने की क्षमता है
शक्ति वही मारण का कारण है
सामर्थ्यशाली व्यक्ति की क्षमता
सदा होती असाधारण है
सामर्थ्य आकाश है 
जहाँ कई आकाश गंगाएँ रहा करती है
सामर्थ्य शिव है
जिनकी जटा से माँ गंगा ही नहीं
पसीने से रेवा बहा करती है
सामर्थ्य वह धैर्य है 
जो संकल्प में पला करता है
संकल्प का बल पा 
सामर्थ्य सदा भला करता है
व्यक्ति वही महान है जो सामर्थ्यशाली है
सामर्थ्यवान व्यक्ति की झोली 
कभी नहीं होती खाली है

1 टिप्पणी:

  1. शक्ति और सामर्थ्य का बोध कराती सुंदर भावपूर्ण कविता..

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