मूर्तियां पत्थर नहीं है
मूर्तियों में चेतना है
मूर्तियां हैं प्राण वाहक
सन्देश ईश को भेजना है
शिल्पियों की ये कहानी
मूर्तियाँ होती पुरानी
मूर्तियां सृजन की पूजन
भाव है संवेदना है
मूर्तियां जगती रही है
मूर्तियां सोती रही है
मूर्त होती कल्पना तो
सृजना की वेदना है
मूर्तियाँ कोमल रही है
मूर्तियां हलचल रही है
मूर्तियां दिखती दिवारें
मूर्तियां निश्चल रही है
मूर्तियां से बात करके
लक्ष्य पावन भेदना है
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