रविवार, 2 अक्तूबर 2011

ईश्वर प्राप्ती

भक्ति से विरक्ति पैदा होती है
अौर शक्ति जाग्रत होती है
भक्ति से अहंकार से मुक्ति मिलती है
अौेर ईश्वर शरणागती होती है
जो भक्ति व्यक्ति मे विरक्ति के स्थान पर
अासक्ति पैदा करे
अौर ईश्वर शरणागति के स्थान पर
अहंकार उत्पन्न करे
वह भक्ति व्यक्ति के अात्मोत्थान करने के स्थान पर
उसके पतन का कारण होती है
अहंकार शून्य एवम समर्पित भाव तथा कर्म से कि
गई ईश्वर साधना से ईश्वर प्राप्ती सुगमता व शीघ्रता से होती है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें