शनिवार, 21 जनवरी 2012

चिन्तन

चिन्ता विष की बेल है, चिन्तन है अमृत
चिन्तन पूजा ध्यान है,चिन्तन मन का व्रत

चिर यौवन का मंत्र ही ,तू चिन्तन को जान
चिन्ता से उमर घटे , बढे सदा अज्ञान


चिन्ता चित से मति हरे,चिन्तन दे चैतन्य
चिन्तन पथ से हरि मिले ,मोक्ष मार्ग अनन्य


चिन्ता का विष छोडकर, कर चिन्तन रसपान
चिन्तन और सत्कर्म से,मिले मधुर मुस्कान


चिन्तनशील चिर काल जिये,चिन्ता देती रोग
चिन्ता मन का बोझ है,चिन्तन मन का योग 


चिंतित मन संत्रस्त रहे चिंता एक अभिशाप
जो चिंतन में मस्त रहे ,,भूले शोक संताप
 

चिंता दुःख का जंजाल हुई ,चिंतन सुखमय नाद
चिंतन का पट खोल ज़रा ,करना ईश संवाद




चिन्तनशील गतिशील रहे ,कर चिन्तन का गान
चिन्तन से हर हल मिले ,सुरभित होता ज्ञान

चिन्तन,मंथन यज्ञ है , चिन्तन एक अभियान
जो ग्रन्थों से पा न सका , उसे चित्त से जान



1 टिप्पणी: