शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2012

भाव करे मन से सत्कार

शर्म भरी गालो की लाली
मीठी गाली मीठा प्यार
सज नही पाया बिन सजना के
सजनी का कोमल श्रंगार

होठो पर मुस्कान रहे तो
पलको पर ठहरा हो प्यार
गहरे बालो मे बिखरा है
मादक,मस्ती का विस्तार
सोच रही तन-मन यह धडकन
मिलने के कब हो आसार

धवल चाँदनी  चन्दा देखे
नवल तृषा देखे उस पार
निशा तो नित ही है होना
कमल चन्द्रमा ले आकार
पायलिया की रून-झुन सुन कर
  गूंज उठी मन मे झंकार

बादल से बरसे है नयना
तरस रहे मन के सुख चैना
सरिता तट केवट आ पहुचा,
जल बिन नैया कैसे बहना
उतर रही है भावो की टोली,
भाव करे मन से सत्कार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें