जिसने कृष्ण की अंगुली थामी , निर्भय हुआ , मुक्त हुआ !
अब यहां उत्तर भटकते और खटकती सोच है पंख फैले पंछीयो के दिख रही यहां चोंच है अब हमें परछाईयों गहराइयों को जानना है ...
जिसने कृष्ण की अंगुली थामी , निर्भय हुआ , मुक्त हुआ !
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