Srijan
शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024
सब कुछ है उपलब्ध
नीति से है न्याय रहा
प्रीति से सामर्थ्य
हम सबके जो पूज्य रहे
उन सबको दे अर्घ्य
प्रीति की कोई उम्र नहीं
प्रीति की न थाह
प्रीति की रीति से रहता
जीवन मे उत्साह
नियति से है भाग्य रहा
पौरूष से प्रारब्ध
जीवन मे सत्कर्म करो
सब कुछ है उपलब्ध
निद्रा में जो शुन्य रहा
उस पर तू कर शोध
हर कण मे वहीं तत्व रहा
आत्मा का हैं बोध
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
आई याद मां की
सखिया करती हास ठिठौली
जिव्हा खोली कविता बोली कानो में मिश्री है घोली जीवन का सूनापन हरती भाव भरी शब्दो की टोली प्यार भरी भाषाए बोले जो भी मन...
जीवित जो आदर्श रखे
सम्वेदना का भाव भरा खरा रहा इन्सान जीवित जो आदर्श रखे पूरे हो अरमान जो पीकर मदमस्त हुआ हुआ व्यर्थ बदनाम बाधाएँ हर और खड़ी...
अपनो को पाए है
करुणा और क्रंदन के गीत यहां आए है सिसकती हुई सांसे है रुदन करती मांए है दुल्हन की मेहंदी तक अभी तक सूख न पाई क्षत विक्षत लाशों में अपन...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें