बुधवार, 18 सितंबर 2013

आत्मा प्रदीप्त है

अंधियारे में जलता ,आस्था का दीप है
आस्था में पूजा  है ,ईश्वर समीप है  
भक्ति में शक्ति है ,शक्ति में है ऊर्जा 
ऊर्जा है भीतर तक ,आत्मा प्रदीप्त है 

तन मन के भीतर ही ,ईश्वर की खोज है 
आत्मा में पावनता ,अंतस में ओज है 
तन मन को चिंतन को ,कर निर्मल जीवन को
चिंतन है चित में ही, कीर्तन में मौज है  http://4.bp.blogspot.com/_e8FOXal27sQ/TCeI_rtQ0SI/AAAAAAAAAIY/xSq_DNVgWXo/s400/Deepak.jpg

1 टिप्पणी:

  1. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (20-09-2013) के चर्चामंच - 1374 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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