संदेश

मई, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

माँ और मैं

माता से यह देह मिली माता से संस्कार माँ के पावन चरणों में वंदन बारम्बार माँ ममता को बाँट रही माता का वात्सल्य माँ से मुक्ति मार्ग मिला माता से केवल्य  माँ का चेहरा भूल गया भुला न पाया स्नेह हर धड़कन माँ व्याप्त रही व्यापे मन औ देह  माँ ने अब तक दुःख सहा सुख न पायी माँ माँ मिटटी बन मिट गई दुःख से काँपी माँ  कांप गया नेपाल यहाँ आया जब भूचाल धरती माता हिल रही पूछती रही सवाल  काया थर थर काँप रही जीर्ण शीर्ण है देह बूढ़ी आँखे तरस रही मिला न निश्छल स्नेह  

एक दृश्य -भूकम्प

आज वहा उजड़े कई  घर है  बिखरे परिवार है  कुछ लोग जो कल तक जीवित थे  गुमशुदा या  विदा है ऊँची  -ऊँची  अट्टालिकाएं  जो कल तक थी इतरा रही  हो गई कुछ ढेर  जो बची है वे हो जायेगी ढेर देर -सबेर  एक बच्चा और एक औरत  तलाशते है सामान को  मिल जाए टूटे घर में से  कुछ बरतन खान पान को  पर मिलता नहीं यह कुछ मिलता है मलबे के ढेर में  एक माँ को बेटे का  एक बेटे को माँ का  एक पत्नी को पति का शव रोते  बिलखते परिवार  बच्चो की किलकारिया  ममता से वंचित शैशव