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मन अमृत है विष मत घोलो

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खुद को तोलो फिर कुछ बोलो  मन अमृत है विष मत घोलो जीवन तो वरदान है  चन्दा तारा यह जग प्यारा  जीवन सारा तू खुद हारा  क्यों करता विषपान है? भाव रंगीले नीले पीले  चिंतन का वट  तट रेतीले  करता क्यों अभिमान है ? पल पल हर पल   कल  छल कल छल  चंचल मन अविराम है  टिम टिम टिम टिम     तारे टिम टिम  रिम -झिम रिम झिम  बारिश रिम झिम  कर लेना रस पान है  राते  गहरी शाम सुनहरी  दिन गुजरे और उषा ठहरी  सुबह की  मुस्कान है  

बहुत है

आप पूजा करो या न करो  पर आपके कारण कोई पूजा करने में समर्थ हो जाए यही बहुत है आप सेवा करो या न करो  आपके कारण कोई सेवा कर पाये यही बहुत है आप दान करो या न करो  पर आपके मितव्ययिता के कारण कोई दान कर पाये यही बहुत है आप अच्छे वस्त्र और आभूषण पहनो या मत पहनो  पर आपके सादगी किसी नंगे गरीब बच्चे और  किसी नारी कि लज्जा ढक  पाये बहुत है आप ईमानदारी से कार्य करो या न करो  आपके व्यवहार से कोई ईमानदार रह पाये पर्याप्त है आप  चरित्रवान रहो या न रहो आपकी ईच्छा  है  पर आपके कारण किसी का चरित्र सुरक्षित रह जाए यह पर्याप्त है  आपका व्रत उपवास उतना नहीं है आवश्यक  जितना आवश्यक है कि किसी भूखे को समय से समुचित भोजन मिल जाए आपकी साधना ईष्ट को  जब ही प्रसन्न कर पायेगी  जब संसार कि प्रत्येक व्यक्ति के प्रति समदृष्टि हो आपकी  प्रत्येक परिस्थिति में आपके मन में उल्लास है  आप पढ़ाई  या स्वाध्याय करो या न करो  पर आपके संयमित आचरण और उदारता से पढ़ पाये आगे बड़ पाये बहुत है आप भले अकर्मण्य रहो भले आलस्य रत हो पड़े रहो  पर आपकी अकर्मण्यता किसी कि सक्रियता बाधित न करे बहुत है आप कुछ अच्छा रच सको या न

नारी और नदि का अस्तित्व

नदि नदि नही नारी है नारी नारी नही नदि है नदि और नारी सब समझती है सब जानती है वह अपने भीतर की कमजोरिया और ताकत को अच्छी तरह पहचानती है जीवन मे कौन है अच्छा और कौन है बुरा कौन है पूर्णता को लिये हुये  और है अादमी अधुरा नदि ने अपना प्रदूषण खुद धोया है घनघोर बारिश के भीतर किया है स्नान  अपना आँचल भींगोया है पर इन्सान ने अपनी गलतियो को नही सुधारा  और फिर खूब रोया है नदि और नारी को कोई कितना भी अपवित्र कर दे  उसके पास पावनता के साधन है और पुरुषो के पास उपयोग है उपभोग है  शोषण की मानसिकता है ,भोग के संसाधन है इसलिये नदि और नारि की सामर्थ्य को कोई नही समझ पाया है नारी ने नदि बन कर और नदि ने बह - बह कर अपना अस्तित्व बचाया है

सूरज की संघर्ष यात्रा

उषा साक्षी है  सूरज के संघर्ष यात्रा की उसने देखा है  सूरज के अँधेरे से लड़ने का साहस सूरज का  वह साहस और पौरुष  जो हम नहीं देख पाए  हमें  तो  केवल  सूरज की सम्पूर्णता का ही अहसास है हम नहीं जान सकते  सूरज ने  सम्पूर्णता पाने के लिए कौनसे दर्द सहे है सूरज के ह्रदय में दुखो के कौनसे लावा बहे है इसके लिए हमें ब्रह्म मुहूर्त में पूरब के क्षितिज  को निहारना होगा देखना होगा की एक अन्धेरा  उदित  होने वाले प्रतिभा के रवि को किस प्रकार डराता है नया नवेला सूरज  जब उगने को होता है  तब  अन्धेरा किस तरह गहराता है जिसने भी सूरज की उस संघर्ष यात्रा को देखा है प्रतिभा रूपी रवि को उसने ही जाना पहचाना है परखा है