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मानव सेवा का वन्दन है

सेवा का जिसमे भाव भरा  करूणा का पाया चन्दन है करुणा से पाई मानवता   मानव सेवा का वन्दन  है तन दुर्बल होकर मरा मरा  मन मूर्छित होकर डरा डरा बचपन ने खोई कोमलता   फूटे सपनों के क्रंदन है लिए  घाव गरीबी  हाथो मे  बूढी माँ रहती लातो मे झुग्गी रोती है रातो मे  सपनों मे रहता नंदन  है  सुख रहा सदा ही भावो में  वह तृप्त रहा अभावो में दुःख महलो में भी पलते है   होते सुविधा में बंधन है

व्यष्टि और सृष्टि

सृष्टि में समष्टि और समष्टि में व्यष्टि समाहित है सृष्टि में जल वायु बच जाए तो सुरक्षित है व्यष्टि ने समष्टि समष्टि ने सृष्टि को किया दूषित है सृष्टि में वृष्टि शीत कही होती है कम कही होती अपरिमित है शहर गाँव सड़क खेत सभी होते आप्लावित है मिल जाए कही निर्मल जल स्वच्छ वायु तो लग जाए चित है निज स्वास्थ्य हमारा मीत है सृष्टि का आरम्भ है मध्य है और अंत भी सुनिश्चित है पर अंत तक चेतना जीवित है इसलिए हे  व्यष्टि तुम समष्टि के संग अपनी सृष्टि को बचाओ सृष्टि रस द्रव्य कण में परम तत्व को पाओ

शक्ति या सामर्थ्य

शक्ति जहा व्यक्ति का बाह्य बल है सामर्थ्य वही व्यक्ति की आंतरिक क्षमता है शक्ति का अर्थ जहाँ यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति किसी को कितना पीट सकता है सामर्थ्य यह प्रकट करता है कि कोई व्यक्ति कितना सह सकता है शक्ति जहाँ आक्रामकता है सामर्थ्य वहा सहिष्णुता है शक्ति करती जहाँ युध्द क्रीड़ा है सामर्थ्य में रहती भीतर की पीड़ा है सागर की लहरे उठ कर ऊपर की लहराती है तूफान के भीतर सुनामी ले आती है तब वह शक्ति की अभिव्यक्ति करती प्रलय मचाती है सामर्थ्य वह है  जो सागर की गहराई में रहता विशाल जल राशि को नापता है पर्वतो की ऊंचाई और विशालता है जिसकी  विराटता को देख हृदय काँपता है सामर्थ्य जहा धारण करने की क्षमता है शक्ति वही मारण का कारण है सामर्थ्यशाली व्यक्ति की क्षमता सदा होती असाधारण है सामर्थ्य आकाश है  जहाँ कई आकाश गंगाएँ रहा करती है सामर्थ्य शिव है जिनकी जटा से माँ गंगा ही नहीं पसीने से रेवा बहा करती है सामर्थ्य वह धैर्य है  जो संकल्प में पला करता है संकल्प का बल पा  सामर्थ्य सदा भला करता है व्यक्ति वही महान है जो सामर्थ्यशाली है सामर्थ्यवान व्यक्ति की झोल