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मार्च, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

preetii

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ख़ूबसूरत आत्मा है खूबसूरत शरीर प्रियतमा के मिलन को मन रखना धीर कान्हा बासुरी बजे यमुना के तीर तुम्ही मेरी राधा हो तुम्ही मेरी हीर भर आये आँखों में यादो के नीर विरह की है टीस ऐसी नित उठती पीर ये दूरिया कम कर दो मेरे जगदीश प्रियतमा में बसती है मेरी तकदीर प्यार ही पूजा है प्रियतम मंदिर मरुथल के जल जैसा ममता का नीर चारो और घिर आया ईर्ष्या तिमिर प्रीती का दीप ऐसा उसको दे चीर भक्तो के ह्रदय में रहते रघुवीर प्रियतमा के चितवन में प्रिय की तस्वीर है प्रश्न खड़े जीवन में कितने गंभीर है कृष्ण खड़े मधुवन में गोपियों से घिर

himaalayi vaade iraado ke liye

बसे घर को सदा से सजाते रहे है नंदन उपवन में बगिया लगाते रहे है अंधरे में दीपक जला नहीं पाए उजाले में सूरज उगाते रहे है निर्झर का पतन गुगुनाते रहे है मरुथल को तरसना सिखाते रहे है उगते अंकुर को जल पिला नहीं पाए गहरे सिंधु में सरिता बहाते रहे है नयन में समंदर बसाए हुए है अगन को ह्रदय में समाये हुए है हिमालयी वादे इरादों के लिए श्रम सीकर की सरिता बहाए हुए

sham

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कंचन सी कौंधी है सुनहरी शाम रश्मी के होठो पर रत्नों के नाम सरोवर के दर्पण में झांके गगन सुगन्धित फूलो से महके पवन चिडियों के कलरव में सरगमी गान भंवरो की गुंजन ने छेड़ी है तान मौजो से तीरों पर नौकाये आई ह्रदय की हल चल ने बनायीं रुबाई गायो के बछड़ो ने तृप्ति बुझाई हो गए जीवंत डगर गली ग्राम लहरों से उठती है शीतल समीर , झील मिलाई मुस्काई सरिता गंभीर प्रियतमा संध्या है प्रेमी गुमनाम शर्मा कर चुप जाती निशा को थाम