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धर्म अंधी आस्था नहीं भगवान विष्णु का चक्र सुदर्शन है

धर्म जीना सीखाता है  धर्म मारना नहीं मरना  सीखाता है  पीडितो असहायों की सेवा  करना , पीड़ा हरना  दुःख दूर करना सीखाता है  धर्म माया नहीं छाया है  धर्म वही  है जो सदाचार के पथ चल आया  है धर्म उजाले का सूरज है  अन्धेरा ढला  तो दिया है  धर्म के पथ पर चल कर  सुकरात और दयानंद ने जहर को पीया है  धर्म कर्म से विमुख कभी नहीं रहा है  कर्म को धर्म गीता में भगवन ने कहा है  धन्य वे है जो धर्म निभा कर कर्मवीर हुए है  सच पूछो तो वे कर्म वीर ही नहीं धर्म वीर हुए है  धर्म वह है जो निर्दोष के प्राण बचाता है  एक अबला की इज्जत और सज्जनता का मान बचाता है  झूठ और मक्कारी को नंगा कर सच्चाई और अच्छाई को गले लगाता है  धरम ईमानदारी और बेईमानी को अपने सही मुकाम तक पहुँचाता है  धर्म अंधी आस्था नहीं भगवान विष्णु का चक्र सुदर्शन है  सच्चाई की ताकत में ही धर्म है भगवन का होता दर्शन है

मुसीबतो का करते रहे इन्तजार है

उन्हें मुसीबतो से कम और सुविधाओ से बहुत प्यार है  हम उपाय खोज कर मुसीबतो का  करते रहे इन्तजार है उनके लिए मुसीबतो का आना एक खौफ है  मुश्किलो से होती रही हमारी नोक झोक है  जीवन में मुसीबतो का सिलसिला है  मुसीबतो के सहारे ही तो हमें यह सब कुछ मिला है  जीवन के समंदर में कही मीठा तो कही खारा जल है  करते रहो लहरो को पार  क्षितिज के उस पार उजला  कल है  उनकी कथनी और करनी में रहा बहुत भेद है  मनसा वाचा कर्मणा से हम एक रहे  तो जीवन गीता उपनिषद वेद है  परिश्रम के पसीने से जिसने कर्मो को सींचा है  हर संकल्प में बल है  हर शब्द एक ब्रह्म और वाक्य उसकी ऋचा है