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मार्च, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्षणिकाएं

(1) वे भ्रष्टाचार उन्मूलन प्रकोष्ठ के है पदाधिकारी मिल जायेगी उनके पास सभी भ्रष्ट अधिकारियो की जानकारी जिसे दबाने के लिए लेते है वे रिश्वत भारी (2) उन्होंने बनाया युवा विचार मंच युवा और विचारो के सिवाय मिल जायेगे सब प्रपंच (3) हाथ से निकले हुए धन के सूत्र है इसलिए वे माता सरस्वती के पुत्र है

प्यार की कमाई

अदाए मदमस्त तेरी मेरी यादो में सजती दिन तो गुजर जाते है रात में तन्हाई डसती तेरी चाहत से मैंने जो राहत पाई है तेरे हाथो में थमा दी है मैंने प्यार की कश्ती दिल के भीतर मैने सूरत तेरी बसाई है मेरे दोसत तेरे प्यार मे सागर सी गहरायी है बदन की खुशबु जो घुल गयी है मेरी साँसो मे वो मेरे प्यार कि थोड़ी सी कमाई है मौसम का तीखा मिजाज है चाहत के नये अन्दाज है आप कही भी रहो सनम रहते हो हर पल मेरे पास है तेरे आने कि खुशी ने जगा दी है आस और जाने के ही गम से हो गये उदास रहते हो हर पल मेरे आस-पास हो जाती दूर उलझने मिलता जीने का साहस बारिश का सुहाना मौसम कितना अनूठा है तनाव भरी व्यस्तता में आनंद जीवन का रूठा है प्रकृति की शरण में रहे घुमे फिरे भ्रमण करे स्वास्थ्य का महामंत्र सच्चा है बाकि सब झूठा है भाग्य के प्राची क्षितिज पर ,उग सूर्य आया है चाँद सा चेहरा तेरा ,जब खिलखिलाया है महकते मोगरे चम्पा चमेली, बाग़ उपवन में मधुरता घुल गई है ,तेरी बोली से मेरे मन में तुम्हारे रुप के कारण, हर पल मुस्कराया है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,चाँद सा चेहरा तेरा ,जब खिलखिलाया है भाग्य के प

यहाँ रंग कही गहराया है

जीवन की आपा धापी में                    अब वक्त कहा मिल पाता है  फागुन की मस्ती छाती है                   मन मन ही मन कुछ गाता है  है सहज सरल से तरल नयन                     मौसम में रंगत आई है  बच्चो की शक्ले  निखर रही                      बस्ती ने रौनक पाई है  संसार सगो का मैला है                     इंसान अकेला ही जाता है  यहाँ बदन गठीला मोहे मन                       सुंदरता सबको भाती है  भीतर जो होती कोमलता                     ओझल होकर रह जाती है  मानव मन का यह दोहरापन                        सौंदर्य कहा रख पाता है यहाँ समय सदा ही सपनो सा                      खुश किस्मत ने ही पाया है  दुःख सह कर भी मद मस्ती का                          यहाँ रंग कही गहराया है  सुख की है छाँव नहीं आती                       सुख सपनो का कब आता है यह रंग बिरंगी दुनिया है                            रंगों में सब कुछ पाया है  फागुन में बसते रंग रहे                          जिसे झूम झूम कर गाया है  रंगों में मस्ती नाच रही                         यह रंग बहुत सिखलाता है

सपने रहे चकोर

सपनो  का आकाश रहा, सपने रहे बुलंद  सपनो भी उन्मुक्त रहे, स्वप्न बसी हर गंध  सपनो का चंदा रहा ,सपने रहे चकोर  निस दिन सपने काट रहे, सपने क्षण के चोर  स्वप्न सलौना वही रहा ,खुल गई निंदिया रैन  प्रियतम नैना ढूँढ रहे, तन मन है बैचेन  अपनों में क्यों व्यस्त रहा ,सपनो में मत जी  सपनो में भी चिंतन कर, सपनो को तू पी