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Geet

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भाव के नहीं ईख है

जिंदगी है धार नदिया  है  दर्द है तकलीफ है  हार तो मिलती रही है  जीत में कहा सीख है  चाहतो के मिल रहे शव ,राहते  मिलती नहीं है  प्यार की तुलसी है झुलसी  नहीं वक्त की मिली भीख है हर तरफ चिंगारियाँ है  किलकारियाँ है चीख है  प्यास ठहरी अधबुझी है फिर मिली कालिख है विष घोले  है सपोले    होले  होले मन टटोले नीम करेले है कसैले  भाव के नहीं ईख है