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झुक जाता आसमान है

जीवन में गौरव और होता स्वाभिमान है कठिनाइया कितनी भी जीत जाता ईमान है व्यक्तित्व में ऊंचाइयां उसने यहाँ पाई है निकलता है सूरज सा झुक जाता आसमान है   जीवन में गौरव है सौरभ है छाया है खुशियों की दुनिया है प्रियतम को पाया है मस्ती की कश्ती है सपनो की बस्ती है सब कुछ है अपनों में सपनो को पाया है    

भरता रहूँ उड़ान

तू प्रीती का गीत रही भीतर की मुस्कान तुझसे जीवन पाऊ मै भरता रहूँ उड़ान    इस जग में जहाँ प्यार रहा सुख है अपरम्पार गहनों में हो पायल तुम जीवन की रफ़्तार तुम धड़कन और सांस रही अमृत का रसपान    तुझपे वारा ये तन मन जो भी कुछ है शेष तू मौसम मधुमास भरी तू विचार विशेष मरते दम तक साथ रहे निकले संग ही प्राण   सारा जीवन प्यार मिले प्राणों का आधार सजनी तेरे साजन पर रख लेना ऐतबार एक नेक हूँ साथ सदा यही सत्य ही जान तुझसे सच्चा प्यार मिला जीवन को आकार  जीवित मेरा स्वप्न रहा तू नदिया की धार  तू ही मन की मीत रही  जीवन का सम्मान