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दिलवर की मुस्कान

घर हो मंदिर प्यार रहे प्यारा सा परिवार प्यार सदा अनमोल रहा भावो का उपहार एक प्यारा सा भाव रहा प्यार सा एक बोध मन के आँगन प्यार रहा प्यार भरा अनुरोध मन व्याकुल है तृप्त नहीं मुझको तू पहचान मन के मांगे नहीं मिली प्रियतम की मुस्कान तन मन पागल प्यार रहा नहीं मिला है चैन आँखे नभ् को ताक रही बीत गई कई रैन मीठी कोमल प्यारी सी होती लब की शान मोहे मुझको न्यारी सी दिलवर की मुस्कान मधुरिम होता होठो पर शब्दों का श्रृंगार अब न छेड़ो कड़वे बोल धधके मन अंगार प्यारा सा संसार रहे मीठे हो हर बोल तू अपने हर सपने को वचनो से ही तोल

अर्थ गहरे व्यर्थ वह निकालती

स्वार्थ से कितने भरे है आईने है बदलते प्यार के यहाँ मायने खो गई इंसानियत तो अब कही  रिश्तो से है रस चुराया भाई ने   इंसानियत अब रक्त रंजीत हो गई है  सद भावनाये अब कहा पर खो गई है करवटे ले रोज हम रोते रहे  वेदना शामिल  जीवन में हो गई है   जो मनुष्यता हमें है पालती अर्थ गहरे व्यर्थ वह निकालती शब्द से घायल हुआ जाता  है मन वह ह्रदय पर घाव गहरे  डालती  

संस्कार

दुरभि रही संधिया और पैतरे कई  लाये है क्योकि नैतिकता के मायने नेता जी  ने पाये है झूठी रही दोस्ती रचते रहे प्रपंच नेता जी ने साध लिया लूट लिया है मंच

टिक रहा विश्वास है

प्रकृति की वंदना का  होता तरीका खास है निसर्ग में है स्वर्ग रहता  स्वर्ग अब वनवास है उत्थित हिमाचय के हृदय में सहजता का वास है टहनियां और फूल पत्ते  कुदरती उल्लास है जो रहा निर्भीक सा मन  जिंदगी वह खास है हट रहा तम हर सवेरे मन में जगा विश्वास है फिर नया जीवन पाया पायी फिर से आस है हर्ष में  है मग्न सारे जग मग नया आकाश है   स्वर्ग भी उतरा जमीं पर स्वर्ग का अहसास है लक्ष्य की एक भूख सी है हर मन मचलती प्यास है धर चला अंगुल रथ पर हे पार्थ क्यो? उदास है  इंदु है वह  सिंधु गहरा बिंदु मे ठहरी आस है हर कही पाया है उसको  रचता रहा वह रास है  पिय मिलन आतुरता है टिक रहा   विश्वास है