संदेश

दिसंबर, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विश्वास की पदचाप है

फूल है गुलकन्द है  गुलकन्द जैसे आप है ह्रदय मे आनंद है  आनंद ही तो आप है स्नेह मे निश्छल है  निर्मल है निष्पाप है प्रतिमूर्ति है सौन्दर्य की  विश्वास की पदचाप है रिश्ते रुहानी हो गये है आजकल सपने सुहाने हो गये है आजकल दिल मे बसी है आपकी सुन्दर छवि पल पल रूलाती याद भी है आजकल

चिंगारिया थी पल रही

जिन्दगी बिन उमंगो के बीती चली जाती है मौत तो दबे पाँव चुप - चाप चली आती  है हम तो हालात की मुंडेर पर रखे हुये दिये है   हवाये सच्चाई की लौ को ही क्यो बुझाती है ? ढेरो थी मुश्किले , मुश्किलो से घिरा इन्सान था सीधा सच्चा था आदमी नही कोई शैतान था दिल मे थी चिंगारीया , चिंगारिया थी पल रही सपनो मे लगी आग थी , घर भी उसका वीरान था पसरा हुआ पाखंड है खोंखले ढकोसले है लोग बाहर से कुछ ओर भीतर से दोगले है आदर्शो की बाते करना अब हो गई फैशन बड़ी - बड़ी बाते बड़े - बड़े लोगो के चोंचले है

विश्वास होते रहे क्यो सशंकित है ?

याद तुम्हारी अाई हम क्या करे ? या तो मर मिटे या जमाने से डरे जबान कुछ बोलने से है डर रही चाहत सागर सी है इस दिल मे भरे सीने मे है अाग अौर उफनता लहू कठिनाईया अनगिनत है किससे कहू या तो चुप रहू अौर चुप - चाप सब सहू धोखे अौर विश्वासघात से बहता है लहू अास्थाये होती रही क्यो कलंकित है ? विश्वास होते रहे क्यो सशंकित है ? चाह कर भी हम अापको भूल नही पाते मेरे दिल रही छवि अापकी अंकित है अाज प्यारा सा गीत गाया है प्यार पुराना समीप अाया है बन गई जिन्दगी पहेलीनुमा प्यार पाकर इसे सुलझाया है

क्या भरोसे के लायक कोई अादमी है ?

जिन्दगी के हालात बहुत हुये विचित्र है दुश्मनो के रूप मे लगते यहा पर मित्र है हम जो समझे है जहाॅ तक अापको रेशमी रूमाल मे लिपटा हुअा एक इत्र है अाॅखो से अाॅसुअो की झडी अाज भी कायम है स्म्रतिया अापकी कितनी कोमल है मुलायम है जीवन मे हालात चाहे कितने भी बदल जाये अाप से होगी सुबह अाप ही पर होगी सायं है ठिठुरता अासमान अौर ठिठुरती जमीं है अाज मौसम मे छाई हुई कुछ नमी है बैचेन हुई भावनाये , अौर निकल गये अाॅसू क्या भरोसे के लायक कोई अादमी है ?

दर्द मे भींगा

दर्द मे भींगा हुआ है सर्दिला मौसम सर्द का मौसम हुआ है सर्द का मौसम झील के झिल - मिल किनारे लहरो की हल चल लहरो की हल - चल हिलाती ठंडी हवा पल पल प्यारा सा जीवन सजा ले ऐ मेरे हम - दम दर्द से घायल हुई है प्यार की पायल प्यार मे पागल समन्दर पागल हुई कोयल साज और  आवाज से ही सज गई सरगम

बहुत कुछ पाया है

आंसुओ की झील मे दिखा दर्द का साया है रोशनिया झिल - मिलाई - चाँद उग आया है जीवन मे कुछ खोया बहुत कुछ पाया है आसमान आस्था का सजाया है पाया है झील सी झील - मिलाई आँखों मे आशाये खिल - खिलाई होठो पर प्यार की भाषाये मंजिले मिल गई जब ख्यालो मे तुम आये मिली खुशियो खुश्बू , खुश्बू पल महकाये निराशा के भीतर भी आशायेहोती है जीवन की मस्ती को आशा संजोती है आशाये सावन है आशाये मधुबन है आशादम पर ही ज्योति है मोती है  

सस्ते थे दिन

--> --> सस्ते जमााने मे सस्ते थे दिन गाॅवो की पगडंडी पगडंडी रंगीन सावन न तरसा था अासमान बरसा था हल थे अौर बक्खर थे हाथो मे फरसा था भक्तो के कीर्तन थे , सब कीर्तन तल्लीन घने घने थे साये  स्नेहिल पल थे पाये लौरी अौर किस्से थे , किस्से थे अपनाये दादी की अाॅखो मे अाॅसू थे गमगीन