संदेश

जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

खुशियो की शहनाईयां

गहरी गहरी खाईया    झीलों की गहराइयां    नभ से निकली उतर रही   कैसी है परछाईया सुंदरता आनंद   उड़ती हुई पतंग    सबने बाँची नभ में नाची ठहरी कही  उमंग   बच्चो  की होती किलकारी खुशियो की शहनाईयां कब तक होगी भ्रान्ति   जीवन हो संक्रांति   मिल मिल कर के बिछुड़ रही   जीवन से सुख शांति   अपनापन था गुजर गया    न होगी भरपाईया कहा गए वो छंद  जीवन का  मकरन्द  महकी महकी गंध  सुरभित से सम्बन्ध  थर थर काया काँप रही  खोई कही रजाईयां

हो नवीन वर्ष पर सोच नई

जीवन के अनुभव अनुपम हो चरणों की रज में चंदन हो हो नवीन वर्ष भी प्रीत भरा प्यारा सा तुमको वंदन हो  अविचलित हो मन  भाव भरे प्रतिपग पथ पर हो फूल धरे रूप हर्षित हो और आकर्षण जीवन खुशिया का नंदन हो  नित नित लगते हो नव मैले जीवन के नभ पर खग खेले सिंचित होती हो पौध नई कुदरत से मस्ती हम ले ले हो नवीन वर्ष पर सोच नई अनुभूति पीड़ा गई गई तृप्ति भी हर मन को छू ले जो गमगीन थे पल वे भूले मूक रही वेदना कुछ बोले शोषित भी अपना मुख खोले जीवन मे हो कुछ आकर्षण शब्दो को हरदम हम तोले रहती मन में करुणा समता हो नवल वर्ष में पावनता नित मानवता के हम सींचे बीज अंकुरित हो फुले फले