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बुधवार, 16 सितंबर 2015

मानव बनता है दानव


बजता डमरू महाकाल का 
नाच रहे नंदी भैरव 
नर से होते नारायण है 
अर्जुन के केशव माधव 

ऊँचे पर्वत गहरी नदिया
नभ पर पंछी की कलरव
हलचल होती मन के भीतर
सृजन स्वर उपजे अभिनव
झरते झरने सात समंदर 
गहरे जीवन के अनुभव 
अंधड़ ,पतझड़ ,बारिश की झड़,
मौसम होते असंभव 

ताल सरोवर भूमि  उर्वर 
गिरता उठता है शैशव 
धर्म कर्म की बात पुरानी 
नया पुराना होता भव 

जीवन से होता परिचय तो 
जीवन की लीला है नव 
जीवन ले ले कुदरत खेले 
विपदायें भीषण तांडव 

कटते  जंगल होते दंगल 
मानव बनता  है दानव 
विस्फोटक की खेप पुरानी 
क्षत विक्षत बिखरे है शव

सोमवार, 18 जुलाई 2011

अब संयम टुटा जाता है

दुष्कर्मो का पाप कुम्भ जब पूरा भरने को आता है
दैत्य शक्ति के दर्प दमन को महाकाल फिर आता है

घाटी में आतंकी बनकर उग्रवाद ने रक्त पिया
कश्मीरी माता बहनों की शर्म लुटी विधवा किया
क्रूर पिशाची उग्रवाद फिर नग्न नृत्य दिखलाता है

भारत माता के बेटे हम कृष्ण बुद्ध के अनुयायी
बामियान की बुद्ध प्रतिमा क्यों थी ?किसने गिरवाई
प्रतिमा से अभिशापित होकर तालिबान मिटा जाता है

छोटे मोटे देशो को भी हमने जीवन दान दिया
बंग देश के हाथो फिर भी अपमानो का जहर पिया
आध्यशक्ति भारत माता का अब संयम टूटा जाता है

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

अब संयम टूटा जाता है

दुष्कर्मो का पाप कुम्भ जब पूरा भरने को आता है
दैत्य शक्ति के दर्प दमन को महाकाल फिर आता है

घाटी में आतंकी बनकर उग्रवाद ने रक्त पिया
कश्मीरी माता बहनों की शर्म लुटी विधवा किया
क्रूर पिशाची उग्रवाद फिर नग्न नृत्य दिखलाता है

भारत माता के बेटे हम कृष्ण बुद्ध के अनुयायी
बामियान की बुद्ध प्रतिमा क्यों थी ?किसने गिरवाई
प्रतिमा से अभिशापित होकर तालिबान मिटा जाता है

छोटे मोटे देशो को भी हमने जीवन दान दिया
बंग देश के हाथो फिर भी अपमानो का जहर पिया
आध्यशक्ति भारत माता का अब संयम टूटा जाता है

हँसते हँसते मिट जाते हैं

अब भाव नही होते दर्पण  जो आँखो से दिख जाते है  न रही  चेतना चिन्गारी  अब कलमकार बिक जाते है  कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा  तलवे सत्ता के चाट रहा...