संदेश

जुलाई, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हे !माधव केशव

चित्र
काया  भी अब क्षीण हुई ,मिटटी हो गया शव  अर्जुन सा मन दीजिये, हे !माधव केशव  राधा सी अब  प्रीत नहीं ,नहीं उध्दव सा ज्ञान  भव् बंधन से मुक्त करे ,शिव जी की मुस्कान 

शिव सतयुग निर्माण

चित्र
चिंता चित से हटी रहे ,चित में हो भगवान  विषपायी शिव पूज्य रहे ,कर शिव का गुणगान  शिव पूजन है सहज सरल , शिव व्यापे अभिषेक  शिव की शक्ति जानिये, शिव शक्ति है एक   सावन पावन  हरा भरा, बारिश की रिम झिम   शिव  जल  का अभियान है, शिव शंकर है हिम  शिव जी सबके परम पिता ,हम बालक अनजान  बालक सा मन  चाहिए चाहिये ,मासूम सी मुस्कान  शिव व्रत और उपवास नहीं , शिव है जग कल्याण  शिव सज्जन के साथ रहे ,शिव सतयुग निर्माण 

परमानंद

व्यक्ति प्रतीक हो या स्थान  उसे पवित्र  बना दो पर  इतना पवित्र बना भी मत दो कि  उ नसे  दुरी स्थापित हो जाए  उनमे परायापन लगने  लगे किसी व्यक्ति विशेष को  इतना पूजनीय आदरणीय मत बना दो कि  उससे हम अनुकरण न कर सके  और हम उसे सिर्फ पूजते रहे  स्वयं को इतना श्रेष्ठ मत मान लो  कि  हम जन सामान्य से दूर हो जाए ऐसी पवित्रता ऐसा पूज्य होना ऐसी श्रेष्ठता  जो आराध्य को साधक से दूर कर दे  और स्वयं को जन सामान्य को दूर निरर्थक है मिथ्या है पाखण्ड से परिपूर्ण है  हमें तो ऐसी सहजता चाहिए  और ईष्ट में ऐसी सरलता चाहिए  कि चहु और अनुभूति होती रहे ईष्ट कि और हम डूब जाए परमानंद में