सुरक्षा उपचार रही सेनेटाइजर फाईन
सेनेटाइजर फाईन रही संचित शुचित ज्ञान
एकांतिक रही साधना कर ले जप तप ध्यान
कवि विवेक भी सोच रहा है कैसा है विज्ञान
कोरोना को बांध रहा , देवी का आव्हान
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...