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मार्च, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

देवी का आव्हान

कोरोना जब साथ रहे , हो जाओ कोरोताईंन सुरक्षा उपचार रही सेनेटाइजर फाईन सेनेटाइजर फाईन रही संचित शुचित ज्ञान एकांतिक रही साधना कर ले जप तप ध्यान कवि विवेक भी सोच रहा है कैसा है विज्ञान कोरोना को बांध रहा , देवी का आव्हान

मचा है हाहाकार

सस्ता चीनी माल मिला, कोरोना भी साथ मर मर करके  लौट रहे , लाशो की बारात लाशो की बारात मिली, हुआ देश कुर्बान अपने घर मे बने रहो इस युग का आव्हान कवि विवेक देख रहा है रहा न शाकाहार अब कुदरत की मार पड़ी मचा है हाहाकार

कोरोना पर दोहे

भीड़  में सबको निगल गया ,कोरोना का दंश  घर मे बस तुम बने रहो , बच जायेगा वंश  जनता का कर्फ्यू रहा ,हो जाओ अब शांत जितने भी थे निपट गये ,पाया है एकांत अब तक जो भी डरे नही , पहुच गये वे जेल मल मल करके हाथ धुले ,निकल गया है तेल जब भी मुश्किल दौर पड़ा ,पहुच गए वो चीन कोरोना से भाग खड़े , होकर दीन और हीन जिसका किस पर असर नही कैसा है ये दौर अमेरिका भी हार गया ,भारत है सिरमौर  यम नियम से मंत्र जपो नव दुर्गा के साथ कट जायेगे कष्ट सभी , कोरोना की घात

कोरोना

विश्व कोरोना से लड़ाई  लड़ने का  दम्भ भर रहा है  दवाई की कंपनीयो  मुनाफा बढ़ रहा है  बाकी सभी का शेयर सूचकांक  घट रहा है  कोरोना का रोना अब सरकारे मीडिया  और इंश्योरेंस कंपनिया रो रही है  सेनेटाइजर उत्पादक की हो गई पौ बारह  नई नई प्रयोगशालाएं खुल रही है विमानन कंपनियों की हालत  जो पहले से बिगड़ी हुई है  अब तो तीर्थो में भी रही न भीड़  सिर्फ कोरोना की ही चर्चा   चेनलो पर छिड़ी हुई है  बाजार माल और सड़कों का भी हाल  नही किसी से छुपा  है । चीन से आयातित माल का  स्टॉक भी रुका  है  बीमारी कोई भी ईलाज नही होने पर  इंसान की मृत्यु तो होनी ही है पर कोरोना संक्रमित व्यक्ति  की कलाई  किसी भी हालात में नही छूनी है  विदेश जाने का मोह भी अब नही रहा है  अपने ही गांव में रहो ,मिली साफ हवा  खेतो में शुध्द जल बहा है  कोरोना रोगी की पीड़ा  अब  सही नही जाती है अकेले ही पड़े रहो ,पड़े पड़े सड़े रहो   अब तो आइसोलेशन वार्ड ही साथी है

कोरोना वायरस

विश्व कोरोना वायरस के कारण  शाकाहार की और बढ़ रहा है  नमस्ते और नमस्कार के माध्यम से  योगासन कर रहा है  रोगों के संक्रमण का खतरा  जब देश पर बढ़ने लगा है  स्वच्छता आदोंलन का  रंग  अब और भी अधिक चढ़ने लगा है  अनियंत्रित जीवन शैली और  अनुचित आहार विहार का ही तो यह परिणाम है  एड्स स्वाईन फ्लू कोरोना तो हुए  मुफ्त में बदनाम है  यम नियम संयम और स्वदेशी उद्यम से  नही फैलेगा कोई संक्रमण है  अधिक मात्रा में आयातित  वस्तुओ से होता  अर्थ व्यवस्था पर अतिक्रमण है  अच्छा स्वास्थ्य पाने का  बस एक यही तरीका है  सीख लो अच्छे खान पान के गुर  जीने का बस सही एक सलीका है  अब छोड़ो कोरोना का रोना  सब कुछ स्वच्छता से ही तो होना है सम्यक आहार विहार से  अपने आचरण को भिगोना है  पवित्रता और दैवीय गुणो के बल पर  करो आराधना  महकेगा जीवन का हर कोना है