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मार्च, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पेड़ बचा लो छाया पा लो

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दिल में दर्द भरा तो छलका  आँखों में भावो का जल  नदिया निर्झर की धाराये बहती जाती है कल -कल   बारिश छम छम नाच रही है  बाँध रखे घूँघरु पायल   चमकी बिजली  गिरते ओले   नभ पर गरजे है बादल          मौसम की होती मनमानी  उठती लहरो की हल चल   मीठी वाणी कोयल रानी  भींगी राहे है खग -दल  मरुथल मांग रहा है पानी  बालू रेती हुई पागल  घायल साँसे वृक्ष कँटीले  दुर्गम  राहे बिछड़ा दल  फाग अनूठे मस्त सुरीले मस्त हवाये हुई चंचल  उजड़े वन तो व्याकुल जीवन  जंगल जंगल है दल दल  चींटी मकड़ी तितली रानी  में भी होता अतुलित बल  प्यासे को पानी  की बूंदे  बूँद दे रही कुछ  सम्बल पेड़ बचा लो छाया पा लो  निखरा होगा भावी कल  बारिश से नदिया पूर होगी   होगा मीठा निर्मल जल 

बिन रंग के जीवन मरा

छंद से जीवन भरा , आनंद से जीवन भरा  स्नेह का यह कन्द ले लो  सदभावना  दे दो ज़रा  चाँदनी मधुकामनी  अब दे रही खुशबू हमें तुम चले  हो छो ड़ कर  मुह मोड़कर धड़कन थमे हम बुलाये तुम  न आये सोच कर कुछ मन डरा    होलिका बन जल रही है    दस दिशाए  छल रही है  गल रही है भावनाए  आशाये मन कि ढल रही है  तुम बसे हो प्यार में ,  विश्वास  को कर दो हरा भाव के भावार्थ है  परमार्थ के कई रूप है  रंगो  से तू खेल होली    क्यों रहा चुप -चुप है ? रंग से रंगीन हुआ मन  बिन रंग के जीवन मरा

कीमत

गुणो के पारखी को ही पता होती है कि सद गुणो की कीमत क्या है? सज्जनो को ही पता होती है कि संस्कारो कि कीमत क्या है? व्यापारी को ही पता होती है व्यवहार और विश्वसनीयता कि कीमत क्या है? ज्ञानी की कीमत क्या है? यह शिक्षित समाज ही जानता है मूर्ख कहा विद्वता कि पहचान कर पाता है भोजन कि कीमत सिर्फ भूख ही तो कर पाती है रेगिस्तान से पूछो कि  प्यास किसे कहते है? प्यासे रह कर  भीषण गर्म लू को लोग कैसे सहते है? ईमानदारी कि कीमत बेईमान को पता नहीं होती  ईमानदार ही बता सकता है कि  ईमानदारी कायम रखने कि कीमत क्या है  क्योकि उसने ईमानदारी कायम रखने कि कीमत समाज  परिवार ,परिवेश ,में जो चुकाई है  बेईमान मानसिकता को पराजित करने के लिए  जीवन में पग -पग पर कई चोटे जो खाई है  प्यार कि कीमत क्या और कितनी होती है  उस व्यक्ति से पूछो जिसने जीवन में ईर्ष्या और और अपमानो को झेला है  प्यार का सरोवर कितना मीठा है  घृणा से लथ -पथ जीवन कितना मैला है