विकलांगता
सपनो को तोड़ नहीं सकती
मानसिकता
गुलामी की दौड़ नहीं सकती
हर
एक अँधेरे को रही दिए की तलाश है
उजाले
की प्यास कभी मुंह मोड़ नहीं
सकती
अब भाव नही होते दर्पण जो आँखो से दिख जाते है न रही चेतना चिन्गारी अब कलमकार बिक जाते है कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा तलवे सत्ता के चाट रहा...