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जनवरी, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

माँ शारदे ,दुलारदे ,जीवन हमारा तार दे

माँ शारदे , दुलार दे ,जीवन हमारा तार दे वसन्त का न अंत हो , वसंत की बहार दे अकर्म का ही अंत हो ,नव चेतना जीवंत हो चलते रहे सुमार्ग पर ,पथ पर सदा वसंत हो वीणामयी पुकार दे ,जीवन मेरा सॅवार दे माँ शारदे  ,हमे प्यार दे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, नही साधना अपूर्ण हो ,आराधना माँ पूर्ण हो वात्सल्य का ही भाव हो, कौशल्यता निपुण हो व्यवहार दे माँ माँ शारदे , विकार सारे मार दे माँ शारदे ,हमे प्यार दे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, आनन्द ही कन्द हो और मुस्कराया छन्द हो बहती हवाये मन्द हो,बिखरी हुई सुगन्ध हो सम्वेदना , विस्तार दे ,विचार दे ,माँ शारदे माँ शारदे ,हमे प्यार दे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, डिगे नही,बिके नही ,थके नही ,रुके नही चरित्र मे हो दृढ़ता ,झुके नही ,चूके नही निखार दे माँ शारदे ,व्यक्तित्व को निखार दे माँ शारदे  ,हमे प्यार दे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मुक्ति का यह अर्थ है

नियमो के अनुकूल जिए हम ,जीवन का मूलमंत्र है आज दिवस गणतंत्र है ,आज दिवस गणतंत्र है व्यक्ति या परिवार देश हो ,करना नव निर्माण है संविधान के पालन से ही ,होता जन कल्याण है नीती,नियम ,कर्तव्यो से ,स्वदेश हुआ स्वतंत्र है आज दिवस गणतंत्र है .............. अनुशासित हो शासित न हो ,मुक्ति का यह अर्थ है आजादी कायम रहने की ,रही सदा यह शर्त है जनहित के चिंतन से ही तो ,स्वस्थ हुआ जनतंत्र है आज दिवस गणतंत्र है............   शोषित न हो पोषित हो जन,जनसेवा का मर्म है पारदर्शिता भी कायम हो,जनगण मन का धर्म है गति मे ही प्रगति निहित है,यही तन्त्र और यंत्र है आज दिवस गणतंत्र है...........

विश्वास

विश्वास वह शब्द है ,जो पत्थर को प्राण देता है विश्वास वह आभास है जो दृष्टि मे दिखाई देता है विश्वास वचन,कर्म है ,विश्वास युगीन धर्म है विश्वास वह अहसास है,कोसो दूर से सुनाई देता है विश्वास जब साकार होता ,आकार स्वप्न लेता है विश्वास बिखर जाने का ,दर्द गहरा होता है विश्वास एक उल्लास है , विश्वास ही उपवास है विश्वास शून्य मानव तो, जीवन का मर्म खोता है पतवार पर विश्वास कर,नाविक नाव खैता है विश्वास वह श्वास है जो नित्य मानव लेता है विश्वास सत्संकल्प ,जिसका न कोई विकल्प है प्रयास पर विश्वास से ,हर संकल्प पूर्ण होता है

चिन्तन

चिन्ता विष की बेल है, चिन्तन है अमृत चिन्तन पूजा ध्यान है,चिन्तन मन का व्रत चिर यौवन का मंत्र ही ,तू चिन्तन को जान चिन्ता से उमर घटे , बढे सदा अज्ञान चिन्ता चित से मति हरे,चिन्तन दे चैतन्य चिन्तन पथ से हरि मिले ,मोक्ष मार्ग अनन्य चिन्ता का विष छोडकर, कर चिन्तन रसपान चिन्तन और सत्कर्म से,मिले मधुर मुस्कान चिन्तनशील चिर काल जिये,चिन्ता देती रोग चिन्ता मन का बोझ है,चिन्तन मन का योग  चिंतित मन संत्रस्त रहे चिंता एक अभिशाप जो चिंतन में मस्त रहे ,,भूले शोक संताप   चिंता दुःख का जंजाल हुई ,चिंतन सुखमय नाद चिंतन का पट खोल ज़रा ,करना ईश संवाद चिन्तनशील गतिशील रहे ,कर चिन्तन का गान चिन्तन से हर हल मिले ,सुरभित होता ज्ञान चिन्तन,मंथन यज्ञ है , चिन्तन एक अभियान जो ग्रन्थों से पा न सका , उसे चित्त से जान

कुछ कही ,कुछ अनकही है

प्रतिदिन पीना पडता है ,जीने के लिये गरल जीवन मे जटिलताये रही, रास्ते नही रहे सरल पीडायें मन की कुछ कही , कुछ अनकही है जर्जर अवस्था से युक्त ,जीवन की खाताबही है संवेदनाये निज ह्रदय की, अब हो रही है तरल सद्भभावना के पंछी को ,गिध्द घृणा के नोंचते है कट जायेगा यह वक्त भी,एकांत मे यह आंसू सोचते है समस्याये सघन गहन हुई, हुये समाधान विरल हर शख्स कि अपनी होती, एक राम कहानी है कथाये नैतिकता की ,नही सुनाते नाना नानी है पस्त विश्वास पर टिका रहा आस्था का धरातल समय ने समग्र चुनौतियों को देखा है परखा है कहा तक ले जायेगी निकम्मो को भाग्य की रेखा है स्वप्न कुसुम खिलने के उपाय ,अब नही रहे  सरल

आत्म विश्वास

बहुत अच्छा है व्यक्ति में आत्म विश्वास हो होता रहे आत्मा का विकास हो आत्मा रहे सदा उल्लास हो परमात्मा के निकट आत्मा का वास हो उतना ही आवश्यक है आत्मा शुध्द हो ,प्रबुध्द हो आत्मा एवं मन में न चलता रहे युध्द हो आत्मोत्थान का मार्ग नही अवरूध्द हो क्योकि आत्म विश्वास का प्रत्यक्ष सम्बन्ध आत्म के शोधन से है आत्म शुध्दि से विकसित आत्म विश्वास में ही निराकार पर ब्रह्म का वास है और उसमे ही रहता है सच्चिदानंद रहता सर्वदा उल्लास है निहित उसी में जीवन के सत्य का आभास है इसलिए आत्म की शुध्दि पर टिका आत्म विश्वास महत्वपूर्ण है ऐसा आत्म विश्वास ही अक्षय है अक्षुण है

दुख सारे बन गये है कला

वो एक अँधेरी रात थी , उस रात में कोई बात थी वह रात हुई जज्बात थी , रह गई अधूरी बात थी एक था भरोसा छल गया , भरी आँख थी काजल गया निखरा हुआ हर पल गया ,एक ख्वाब था जो जल गया बुझे रोशनी के थे दिए , गुप - चुप हुई कुछ घात थी दिल को कहा सकून था , बचपन गया कही गुम था यौवन लिए नई धुन था , हुआ रिश्तो का खून था ठोकर मिली कसैला मन था ,बिलकुल नहीं मिठास थी हमें प्रेम जो भी मिला , करता रहा शिकवा गिला राहत भरा न पल मिला ,न चाहतो का फुल खिला ढूँढते रहे बाजार में ,न दिल की मिली किताब थी चले रास्ते पे दो कदम , पाई रिश्तो से थी हर चुभन भरे नीर से भावुक नयन , बना भावनाओं का भवन मिला नियति का नहीं चयन, हुई दर्द की बरसात थी कहा हौसलों को बल मिला ,रहा काँटों का ही सिलसिला सुख का सहारा न मिला ,मिला दुखो का  ही काफिला   लुटी  ख्वाहिशे फिर भी चला , चलते हुए हुई रात थी

रह गई अधूरी बात थी

वो एक अँधेरी रात थी उस रात में कोई बात थी हुई रात भी जज्बात थी रह गई अधूरी बात थी एक ख़्वाब का घर जल गया खुली आँख से काजल गया फिर भी भरम में हम रहे विश्वास से हुई घात थी मिला दिल का नहीं सकून था बचपन गया कही गुम था रिश्तो का हुआ खून था निहित स्वार्थ की सौगात थी हमें प्यार से जो भी मिला करता रहा शिकवा गिला कही चाहत भरा न पल मिला मिली दिल की नहीं किताब थी चले रास्तो पे दो कदम मिली रिश्तो से थी हर चुभन भरे नीर से मेरे नयन दुःख दर्द की बरसात थी नहीं हौसलों को बल मिला मिले धोखे तो निश्चय हिला लुटी ख्वाहिशे फिर भी चला चलते हुए हुई रात थी