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मूल्यों को दे चुके बिदाई

नये साल की तुम्हे बधाई बुरा वक्त है सम्हालना भाई गया अन्धेरा विगत वर्ष का नवीन वर्ष की भौर सुहाई  बीता बरस था बड़ा ही क्रूर  चक्रवात नदिया भरपूर  क्रूर काल से कोई नहीं दूर  समय के आगे सब मजबूर  दुस्वप्नो ने नींद उड़ाई  आंसू अरमानो की कमाई   सुख- संचय की दौड़ भाग में  सुध-बुध खुद की बिसराई   करे प्रियंका नृत्य निराला  प्रतिभा को दे देश निकाला  टू-जी -स्पेक्ट्रम का घौटाला बेईमान धन का रखवाला सच्चाई के होठ सिल चुके  तंत्र बना मकड़ी का जाला मूल्यों को दे चुके बिदाई गुंडों की हो चुकी रिहाई

मन कुन्दन बन जाये |

तेरा ईश तुझमे रहे , भीतर दीप जलाये उर के तम को दीप्त करे , परमात्मा दिख जाये ||1|| आग बबुला क्यो हुआ , पावक देह लगाये मन मे शीतलता धरे , शिव सहज मिल जाये ||2|| निर्मल कर निज आत्मा , निर्विकार मिल जाये दुर्जन दल दुष्टात्मा , पापी जन पछताय ||3|| कर्मयोग का मार्ग चले , जीवन ज्योत जलाय आत्म बोध का तत्व मिले , मन कुन्दन बन जाये ||4|| अमर्यादित आचरण , तेरे मन क्यो भाय समय बडा अनमोल है , स्वर्ण समय बीत जाय ||5|| सहन कर आलोचना , भय क्यो तुझे सताय छैनी पत्थर पर पडे , देवात्मा बस जाय ||6|| छप्पन के इस भोग का , लगा है ऐसा रोग तिर्थों मे पण्डे पडे , बने तीर्थ उद्योग ||7||

रहे नयन विश्वास सदा

नयन बिन सौन्दर्य नही , भरा नयन मे नीर नयन बिन दिखते नही , मनोभाव और पीर ||1|| रहे नयन विश्वास सदा , नयन चलाते तीर नयनो से आकृष्ट हुई , नयन चंचला हीर ||2|| नयन बिन सूरदास रहे , बसे नयन रघुवीर नयनो से दिखती नही , आत्मा की तस्वीर ||3|| नयनो मे काजल बसे , बसे लाज का नीर नयनों के कटाक्ष यहा , देते उर को पीर ||4|| यह शरीर एक दुर्ग है ,  और नयन प्राचीर जो नैनो से समझ सके , बने वही महावीर ||5|| दो नयनो से दिखे नही , बाते कुछ गम्भीर अनुभव , प्रज्ञा नैत्र से , दिखे क्षीर और नीर ||6||

ह्रदय मे उल्लास भर कर,राह करना पार

जिन्दगी के पथ पर मत मान लेना हार ह्रदय मे उल्लास भर कर , राह करना पार दूर कर दिल कि टूटन को छोड दे मन की घुटन को सामने मंजिल खडी है कर रही सत्कार आदते  जो भी बुरी है छल कपट की वे धुरी है आचरण अपना बदल दे है सत्य निर्विकार सोच का विस्तार ही तो हर स्वप्न का आधार श्रम देता है सदा ही हर सोच को आकार हो रहा मानस दूषित , भावनाये है  कलुषित सच्चाई कि ताकत बनी है आज की तलवार हर चूभन और घाव पर ही पड रहे है वार भेद क्यो तू खोले मन का हर तरफ गद्दार

सपनों का संसार

सपना अपना रह नहीं पाया व्यथा ह्रदय की कह नहीं पाया कुछ यादे सपनों में बसती आशाओं की बहती कश्ती मन की आशाओं का पंछी केवल सपनों में उड़ पाया सपनो का अपना आकर्षण निज इच्छा का होता दर्पण दर्पण के भीतर रह - रह कर सपनो का साया मुस्काया निर्धन का सुख सपनों में है ह्रदय का सुख अपनों में है अपनों से अपनापन पाकर जीवन का सारा सुख पाया सपनो का श्रृंगार करे हम हर सपना घावो मलहम सपनों का संसार सजाकर , यह मन पीड़ा को हर पाया
मतदाता जागरुक का कितना कठिन सवाल नेताजी कर पायेगे पारित जन- लोक पाल पारित जन लोक पाल नही,फिर क्यो करत धमाल सी,बी,आई ,लेट करे,जांच और पड़ताल  अन्ना जी भी छोड रहे अब दिल्ली का छोर जड़ो  से जुड़ता जनमत है,चले जड़ो  की और 

बना समन्दर जल था थोडा

काल का घोडा सरपट दौडा सुख का दामन हमने छोडा हर मुश्किल आसान हो गई जब कर्मो से नाता जोडा नियति ने की यूँ मनमानी बना समन्दर जल था थोडा तिनका तिनका जोड - जोड कर सुख सपनों का घर है जोडा नही फलीभूत हुई बेईमानी दुष्कर्मो पर पडा हथौडा व्यथा ह्रदय की कैसे बोले  , सुनी है जिसने हाथ मरौडा दुर्जन दल के गठबन्धन थे सत के पथ पर बन गये रोडा थी कैसी उनकी नादानी हुए शर्म से पानी पानी जान निकल गई दिल है तोडा दे गये गम थे तन्हा छोडा

वह गीत गजल गीतिका बन महफिल सजाती है

मन के भीतर के पटल पर कल्पना उभर आती है   भिन्न रूपों में हो बिम्बित कलाये मुस्कराती है     लिए ह्रदय आनंद कंद मस्ती लुटाती है   वह शब्द शिल्प से अलंकृत श्रृंगार पाती है    संवेदना का भाव लिए हर पल सताती है   वह गीत गजल गीतिका बन महफिल सजाती है   लेकर गुलाबी सी लहर चहु और छाती है   वह स्वयं सिद्दा बन गजल हल चल मचाती है

तुम्हारे उजले कर्मों से ,खुश भगवान होता है

सजा दे गीत मे क्रन्दन दुखी होकर क्यो रोता है मिला उसको वही फल है जो जैसा बीज बोता है || ध्रुव पद || पतन की राह पर चलकर , पतित इन्सान होता है सही हमराही मिल जाये , सफर आसान होता है केवल सपने सजाने से , नही मंजिल मिला करती सतत यत्नों के बल पर तो , तेरा हर काम होता है ||1|| सजा दे गीत मे क्रन्दन ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, तेरे ईमान डिगने का , पता सभी को होता है तुझे मालुम नही बंदे , तू हर विश्वास खोता है कभी सच्चाई की आवाज को , अपना स्वर दे देना हमारे सारे कर्मो का , खूब हिसाब होता है || 2|| सजा दे गीत मे क्रन्दन ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, यदि है राह पर कांटे , तो आँखे क्यो भिंगोता है बना दे जिन्दगी सरगम , जग खुशियों का ढोता है पराई पीर मे अपनी पीर की तलाश कर लेना पराई पीर के भीतर अजीब अहसास होता है || 3|| सजा दे गीत मे क्रन्दन ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, शिथिल कर माया के बंधन , समय प्यारा क्यो खोता है लगा ले चिन्तन का मधुबन , मधु मय छन्द होता है किसी गमगीन चेहरे को , मधुर मुस्कान दे देना

शब्दकोष के बल पर केवल काव्य नही रच पाता है

व्याभिचार मे जीने वाले को अंधियारा भाता है सदाचार से रहने वाला गीत रवि के गाता है प्रियतम का उत्कट अभिलाषी प्रभु प्रीति तक जााता है साॅसों के स्पंदन जैसा प्रिय का प्रिय से नाता है शब्दकोष के बल पर केवल काव्य नही रच पाता है संवेदना से रिक्त ह्दय मे रहा सदा ही सन्नाटा है पुण्य , ज्ञान , पुरुषार्थ यहाँ पर व्यर्थ कभी नही जाता है दुष्कर्मों के दम पर कोई व्यक्ति नही सुख पाता है स्वाभिमान पर रहने वाला कठिन राह चल पाता है तिनका - तिनका जोड़कर - जोड़कर , स्वर्ग धरा पर लाता है दुष्ट , दम्भी , मिथ्याभिमानी , जो छल छद्म रचवाता है नीच कर्म से लज्जित होकर , आँख मिला नहीं पाता है कला विहीन जीवन क्यो ? जिए काव्य ह्रदय से अाता है कलाकार संगीत कला का गीत गजल से नाता है    ,