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राखी में आशा समाई

दर्द के हालात है, या फिर यहाँ कुछ और है  आचरण छल से भरे है , हर आवरण में चोर है विशिष्ट न अब  शिष्ट रह गए , विशिष्ट अब निकृष्ट है शुध्द न पर्यांवरण है, दिखती नहीं कही भोर है  अश्रु से आँचल भरा है ,आँख रोई है भींगोई पीड़ा क्रीड़ा कर रही है, ,माँ तो बैठी है रसोई  भैया भाभी ले गए है ,राजू अम्मा रह गए है  राखी न आई कही से ,आये न बहना बहनोई  बहना  हो गई है पराई  बहना की राखी है आई  राखी में रहती सुरक्षा   राखी में आशा समाई   

एक मुलाक़ात बाकी है

छू  लो नभ को सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ते हुए अभी भी बहुत साहस है कुछ  सांस  बाकी है  पा लो खुशियो को हालात से लड़ते हुए  संघर्षो का साथ जज्बातों की बरात बाकी है  जी लो हर पल को उल्लास से बढ़ते  हुए  जीवन नहीं है नीरस रस भरा मधुमास बाकी है  बुझा लो प्यास अंजुली भर आचमन से  बहुत ताजा है पानी पूरी बरसात बाकी है  बहुत किलकारियाँ भीड़ है चहु शोर है  मिले ख्वाईश को पंख एक मुलाक़ात बाकी है

भाव विसर्जन

अंजन ,मंजन, मन का रंजन  वंदन, चन्दन, भावुक बंधन नवल ,धवल है साँझ सवेरे  सपने तेरे ,सपने मेरे  स्वप्न प्रदर्शन ,चित का रंजन अर्पण ,तर्पण, व्याकुल दर्पण  लगी प्यासी है ,भाव समर्पण  दया भाव हो ,नहीं हो क्रंदन  सर्जन, अर्जन, भाव विसर्जन  मिली सांस , पाया बल वर्धन  गजल गीत का, हो अभिनंदन  छाया माया ,कुछ भी न पाया  शिल्प कला से ,मन भर आया कला कर्म का ,महिमा मंडन