ये होता कैसा नन्दन है
ये भाव अनोखे भरे भरे
ये रिश्ते होते खरे खरे
शब्दों के मोती झरे झरे
इन आँखो में अभिनन्दन है
हृदय से निकला वंदन है
ये मोर पंख की सुंदरता
इस नभ से अमृत है बटता
जीवन से रस न हैं घटता
यहां समरसता का चंदन है
देखा दुखियो का कदन है j
जिन आँखों में है प्यार रहा
उन आँखों में आभार रहा
सबको ईश्वर है तार रहा
प्राणों से उसके तार जुड़े
ये प्राणों का स्पन्दन है