बुधवार, 12 अगस्त 2026

अर्चना संगीत लय में

वो नही संशय मे  भय में 
रहता  वो  तो  हृदय में 

वो तिमिर को दीप देता
 है समीर का वो प्रणेता 
प्राची मे उषा रहा  है 
वो रहा सृजन प्रलय में

धैर्य को खोता नही  है 
वो कभी सोता नही  है 
बह रहा है वह समय में
और प्राची में रहता उदय में

वो  कोई  गिनती  नहीं  है  
वो  कोई  विनती  नहीं  है 
वो  रहा  पुरुषार्थ  कर्म 
अर्चना  संगीत लय  में 

चाहता  उसको  धरू में 
जाप कर  उस  पर  मरू  में 
बारिशों  में  बूँद  जैसा 
वो  कामना  में  न  विषय  में 


वातावरण का साथ दे


 

शनिवार, 8 अगस्त 2026

और सपने थे बिखरने

झर रहा बारिश का मौसम 
कर रहे श्रृंगार झरने 
चल पड़े बादल यहा पे 
सिंधु से जल को है भरने
 न रही मासूम कलियां 
जब रहा संसार छलिया
 रह गई केवल घटाए 
और सपने  थे बिखरने

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

नर्म कोमल सी हथेली

झर गई बारिश से कलियाँ 
पत्तिया बूँदों  ने धोई 
है यहा अधरों पे खुशियां 
क्या कर गया श्रृंगार कोई 
डालियों  पर फूल अटके 
शूल भी आँखों को खटके 
नर्म कोमल सी हथेली 
टहनियो को यहा चुभोई

बुधवार, 15 जुलाई 2026

हँसते हँसते मिट जाते हैं



अब भाव नही होते दर्पण 
जो आँखो से दिख जाते है 
न रही चेतना चिन्गारी 
अब कलमकार बिक जाते है 
कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा 
तलवे सत्ता के चाट रहा 
जो लिख रहे हैं चिन्गारी 
हँसते हँसते मिट जाते हैं

सोमवार, 13 जुलाई 2026

भाव है संवेदना है

मूर्तियां  पत्थर  नहीं  है  
मूर्तियों  में  चेतना  है 
मूर्तियां  हैं  प्राण  वाहक 
सन्देश  ईश को  भेजना  है
शिल्पियों  की  ये  कहानी 
मूर्तियाँ  होती  पुरानी 
 मूर्तियां  सृजन  की  पूजन 
भाव  है  संवेदना  है 
मूर्तियां  जगती  रही  है 
मूर्तियां  सोती  रही  है 
मूर्त  होती कल्पना  तो 
सृजना की  वेदना  है 
मूर्तियाँ  कोमल  रही  है 
मूर्तियां  हलचल  रही  है 
मूर्तियां  दिखती  दिवारें 
मूर्तियां  निश्चल  रही  है 
मूर्तियां  से  बात  करके 
लक्ष्य  पावन  भेदना  है 

होता वह पिता है

खुद ही से है हारा
खुद ही से जीता है 
लड़ा युध्द जिसने 
बना विजेता है।
मरा है जिया है 
सभी कुछ किया है 
शिकायत न करता
वह होता पिता है 

अर्चना संगीत लय में

वो नही संशय मे  भय में  रहता  वो  तो  हृदय में  वो तिमिर को दीप देता  है समीर का वो प्रणेता  प्राची मे उषा रहा  है  वो रहा सृजन प्रलय में धै...