सोमवार, 19 जुलाई 2021

ऊँचे ऊँचे लोग

उसके गुण का गान करो , जिसमे हो संस्कार 
कर्मठता का मान करो , कर्मो का सत्कार

जिसमे थी सामर्थ्य नही ,मिली उन्हें है छूट
दानव दल को बाँट रहा, अमृत घट के घूँट

भक्ति का अभिमान रहा , शक्ति से अनजान
क्यो उसका अपमान किया , जिसमे था भगवान

क्यो?इतना पाखण्ड रहा , क्यो इतना है पाप 
तू अपने दुष्कर्मो को , नाप सके तो नाप

राम नाम दिन रात जपा, बना न फिर भी योग
सच्चाई के साथ नही , ऊँचे ऊँचे लोग




सोमवार, 28 जून 2021

मिले चोर ही चोर


धन से कोई धनी हुुुआ, बल से है बलवान
तू अपने सत्कर्मो से , खुद को बना महान

धन नही सुखी हुआ, दुख सुविधा के संग 
दुविधा में भी सुखी रहे , उसके संग उमंग

जब भी उनके होठ रही , प्यारी सी मुस्कान 
प्यारी प्यारी रही जिंदगी, हर मुश्किल आसान

जीना तो मुश्किल हुआ, मरना है आसान
जी जी करके रोज मरा , दुनिया मे इन्सान

अपनो से वे छले गये, मिले चोर ही चोर
आँसू थे जो सूख गये, ऐसा कैसा दौर

उनकी अपनी सोच रही , उनके रहे विचार 
तू ही अपना भाग्य बना, कर सपने साकार

रविवार, 27 जून 2021

सीख की बाते कौन सुने

सुबह में है ओंस रही , सायं बही बयार 
बारिश में कई गाँव बहे , डूब गये घर बार

अपने  अपने शौक रहे, अपनी रही पसन्द
सीख की बाते कौन सुने, मन की खिड़की बन्द

मन से खूब धनवान रहे, तन पे है पैबन्द
ऐसे भी कुछ लोग मिले, जो है नेक पसन्द

केवल पद का भान रहा, हुआ समय का फेर
जिनको मद अभिमान रहा, हो गये पल में ढेर

जितना मन पर भार रहा ,उतना रहा उधार
जीवन का है मूल्य बड़ा, निज का करो सुधार

जिसका प्रत्येक कर्म रहा, प्रतिफल को उत्सुक
उसको मालूम धर्म नहीं , बस कीर्ति की भूख


शुक्रवार, 25 जून 2021

यादो में बचपन

यादो में आंखों के आँसू , यादे है बादल 
यादे होती मित्र सहेली, यादे से पागल

यादो में है एक खिलौना  यादो में है खेल
दिखती सुन्दर नई हवेली, आँगन में थी बेल

यादे होती एक बिछौना खोया एक रुमाल
जितनी सुन्दर याद रही , उतने बीते साल 

यादो में पीर पराई , पर पीड़ा पहचान
जितना जीवन जी पाया , उतनी रख मुस्कान

जितने सुन्दर बोल रहे ,उतनी सुन्दर याद 
खुद के अन्दर झांको तो , होगा न बरबाद

यादो में है एक कहानी , यादो में बचपन
यादो में है शौख जवानी , यादो में पचपन

यादे होती एक पहेली , यादो से सूझ बूझ 
जब तक दिल मे याद रही , होती है महफूज

जब तक दिल मे याद रही ,तब तक है सम्वाद
उनको जब कुछ याद नही, रिश्ते है बरबाद

यादो को वो भूल रहे, भूल रहे इतिहास
यादो में जब दिखी रोशनी , हुआ पुष्ट विश्वास




रोगों की विष बैल

योगी से है  दूर रहे , पित्त वात कफ दोष
अंतर्मन से सुखी रहे, रखता जो संतोष

जीवन कोई खेल नही, क्यो होता है फेल
दुष्कर्मो से ऊँगी यहाँ, रोगों की विष बैल

योगासन से प्रीत लगा, प्राणों का आयाम 
प्राणों को जो भेद रहा, वह जाता शिवधाम

धरती अम्बर बोल रहे , सूरज का शासन 
सूरज को प्रणाम करो , कर लो शीर्षासन

धन वैभव तो चले गये ,रहा है केवल दुख
यम नियम से यही मिला, है जितना भी सुख

शुक्रवार, 18 जून 2021

अंधी धन की भूख


अंधियारी इक रात हुई अंधियारे में बात
अंधियारे में हुई साधना,अँधियारा सौगात

अंधी बहरी हुई वेदना, अन्धा  बहरा युग
अंधी होती रही कामना , अंधी धन की भूख

अंधी होती रही आस्था, आस्था का सम्बल
सीधा सच्चा चलो रास्ता , फैले है दल दल

अंधो की न हुई शाम है , हुये दिन न रात
अन्धो का है यही ठिकाना, अन्धो के दिन सात

अंधो की है रही वेदना,, कर लो तुम अहसास
भीतर उनके रही चेतना, अनुभव मोती पास 

अंधे बहरे मौन रहे , सम्वेदना से शून्य
सम्बन्धो से रिक्त हुए , ऐसे कैसे पुण्य


शुक्रवार, 11 जून 2021

झुका नही यह सिर

प्रतिपल होते मस्त रहे ,भरते रहे उड़ान 
वो सुविधा के संग रहे , मेरे संग मुस्कान

उनका प्यारा कोई रहा ,मुझको सबसे प्यार 
जीवन में  न कोई सगा, जाना है उस पार

एक अकेला मौन रहा ,रहा भीड़ में शोर 
जो न भीड़ का भाग रहा ,वह होता कुछ और

दूजे को तो दोष दिया ,लिया स्वयं ने श्रेय 
उसका होता कोई नही ,मिला नही है ध्येय 

चंचल नदिया नीर रहा,रहा अडिग है गिर 
जीवन मे तू आग लगा ,झुका नही यह सिर




ऊँचे ऊँचे लोग

उसके गुण का गान करो , जिसमे हो संस्कार  कर्मठता का मान करो , कर्मो का सत्कार जिसमे थी सामर्थ्य नही ,मिली उन्हें है छूट दानव दल को बाँट रहा, ...