सो गई है रात ऐसी
पीठ पीछे दोगले है
सामने बनते हितैषी
हौसले अब थक चुके हैं
स्वाद दुख के चख चुके है
जग यहा होता न अपना
कामनाए है विदेशी
जागती है ये सुबह सो गई है रात ऐसी पीठ पीछे दोगले है सामने बनते हितैषी हौसले अब थक चुके हैं स्वाद दुख के चख चुके है ...