कर रहे श्रृंगार झरने
चल पड़े बादल यहा पे
सिंधु से जल को है भरने
न रही मासूम कलियां
जब रहा संसार छलिया
रह गई केवल घटाए
और सपने थे बिखरने
झर रहा बारिश का मौसम कर रहे श्रृंगार झरने चल पड़े बादल यहा पे सिंधु से जल को है भरने न रही मासूम कलियां जब रहा संसार छलिया रह गई केवल ...