मंगलवार, 7 जुलाई 2026

देखा दुखियों का क्रंदन है

यह कैसा होता बंधन हैं 
ये होता कैसा नन्दन है 

ये भाव अनोखे भरे भरे 
ये रिश्ते होते खरे खरे 
शब्दों के मोती झरे झरे 
इन आँखो में अभिनन्दन है 
हृदय से निकला वंदन है 

 ये मोर पंख की सुंदरता
 इस नभ से अमृत है बटता 
जीवन से रस न हैं घटता 
यहां समरसता का चंदन  है 
देखा दुखियो का कदन है j

बुजुर्ग की व्यथा

उसके जो भी थे इरादे 
वो अभी तक सींच लिए हैं 
साथ में रहता न कोई 
हाथ भी तो खींच लिए है 
जब खुशी होठों न आयें  
नही आंखे मुस्कुराए 
हम  रहेगे  किसलिए  है 
 हम जिएंगे किसलिए  है 


शनिवार, 4 जुलाई 2026

कहते

होंठ  जिसको  गुनगुनाये 
तो  उसे  हम  गीत  कहते 
ये  हृदय  भूलने  न  पाए 
तो  उसे  हम  मीत कहते 
जो  पुरानी  रुढियों  को 
पीढ़ियों  से  जी  रही  है 
हम  उसे  हैं  प्रीत  कहते
तुम  उसे  है  रीत  कहतें 

गुरुवार, 2 जुलाई 2026

छन्द को जीवन तो दे दो



छन्द को जीवन तो दे दो
ज़िंदगी गाती नही है 
गीत कोई मर रहा हैं 
गीत का साथी नही है 
है अधूरे और पुराने 
गीत हृदय में लिखे है
 पंखुड़ी से प्रीत करते
 भ्रमर भी गुंजित दिखे है 
वो नही होती है कविता 
जो होंठ पर आती नही है 

रविवार, 28 जून 2026

हर हृदय को भेदना है

अक्षरों को  यूँ सजाकर

हर हृदय को भेदना है 

ईश्वर पत्थर नही है 

वह सहज सम्वेदना है 

हो भले काली कोयलिया

प्रीत के गीत गायेगी

लाएगी बारिश धरा पे

खुद को को वो तरसायेगी

आत्मा को शुद्ध कर कर 

ईश मिलन को भेजना है 

शुक्रवार, 15 मई 2026

पर कुछ न कुछ तो लोच है



 अब  यहां  उत्तर  भटकते 
और  खटकती सोच  है 
पंख  फैले  पंछीयो  के 
 दिख  रही  यहां  चोंच  है 

अब  हमें  परछाईयों  
गहराइयों  को  जानना  है 
रास्ते  में क्यों उखड़ती
 हर  श्वास  को  पहचानना  है 
प्रश्न  शाश्वत  है पुराने  
पर  नवीनतम  खोज  है 


हो गई  भयभीत  लताएँ 
चिड़िया  न गीत  गाये 
चिट्ठियां  आती  नहीं  अब 
दिल  की  बातें  जो  बताए 
न कभी  स्वीकारते  वे  
पर  कुछ न कुछ तो लोच  है 

शुक्रवार, 8 मई 2026

ठहरी हुई टहनी है


व्यथा  की  कथायें 
 बहुत  कुछ  कहनी है 
ठहरे  हुये  पल 
 ठहरी  हुई    टहनी है
क्रीड़ा  में  पीड़ा  है
  पीड़ा  में  क्रीड़ा  है 
मौसम  की  गर्मी  ही
  आज हमें  सहनी  है 

देखा दुखियों का क्रंदन है

यह कैसा होता बंधन हैं  ये होता कैसा नन्दन है  ये भाव अनोखे भरे भरे  ये रिश्ते होते खरे खरे  शब्दों के मोती झरे झरे  इन आँखो में अभिनन्दन है ...