और खटकती सोच है
पंख फैले पंछीयो के
दिख रही यहां चोंच है
अब हमें परछाईयों
गहराइयों को जानना है
रास्ते में क्यों उखड़ती
हर श्वास को पहचानना है
प्रश्न शाश्वत है पुराने
पर नवीनतम खोज है
हो गई भयभीत लताएँ
चिड़िया न गीत गाए
चिट्ठियां न आई है अब
दिल की बाते जो बताए
न कभी स्वीकारते वे
पर कुछ न कुछ तो लोच है


