अक्षरों को यूँ सजाकर
हर हृदय को भेदना है
ईश्वर पत्थर नही है
वह सहज सम्वेदना है
हो भले काली कोयलिया
प्रीत के गीत गायेगी
लाएगी बारिश धरा पे
खुद को को वो तरसायेगी
आत्मा को शुद्ध कर कर
ईश मिलन को भेजना है
अक्षरों को यूँ सजाकर हर हृदय को भेदना है ईश्वर पत्थर नही है वह सहज सम्वेदना है हो भले काली कोयलिया प्रीत के गीत गायेगी लाएगी बारिश धरा प...