उनके वो आंसु पोंछ रहा
जिनकी पीडा मे पानी था
जो दर्द बसा था सीने
वो दुख की ही राजधानी था
खाली खाली सा लगता था
वो हरियाली सा दिखता था
सौंदर्य नही था जीवन में
तन मन की होती हानि था
उनके वो आंसु पोंछ रहा जिनकी पीडा मे पानी था जो दर्द बसा था सीने वो दुख की ही राजधानी था खाली खाली सा लगता था वो हरियाली सा दिखता था सौं...