बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

दो कन्या को प्यार


कन्या कोई अभिशाप नहीं ,कन्या है वरदान
कन्या से धन धान्य मिले ,कर कन्या गुण-गान
कन्या से ही काव्य सजा ,सजा सुखी संसार
कन्या से ही धन्य हुआ ,धवल हुआ घर-द्वार
कन्या ने ही प्यार दिया ,दी पायल झंकार
कन्या से मुग्ध हुआ ,कलाकार फ़नकार
कन्या भ्रूण चीत्कार रहा ,मत ले उसके प्राण
कन्या पुत्री रत्न बने ,करे नवीन निर्माण
काव्य रचा तो शब्द बचा ,बचा स्वपन संसार
कन्या ने ही विश्व रचा ,दो कन्या को प्यार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

युग युग तक जीता है

अंधियारा रह रह कर आंसू को पीता है  चलते ही रहना है कहती यह गीता है कर्मों का यह वट है निश्छल है कर्मठ है कर्मों का उजियारा युग युग तक जीता ह...