Srijan
मंगलवार, 4 नवंबर 2014
Geet
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वातावरण का साथ दे
आई याद मां की
वेदना ने कुछ कहा है
सखिया करती हास ठिठौली
जिव्हा खोली कविता बोली कानो में मिश्री है घोली जीवन का सूनापन हरती भाव भरी शब्दो की टोली प्यार भरी भाषाए बोले जो भी मन...
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