घर में ही सुख है और सुरक्षा भी
अब भाव नही होते दर्पण जो आँखो से दिख जाते है न रही चेतना चिन्गारी अब कलमकार बिक जाते है कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा तलवे सत्ता के चाट रहा...
घर में ही सुख है और सुरक्षा भी
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