शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

जीवन जल की धारा सा

आसमान में तारा सा 
जीवन जल की धारा सा 

बहती हुई हवाये  है 
सुख दुःख इसमें पाये है 
हारा सा दुखियारा सा 
खट्टा मीठा खारा सा 

किस्मत किसने पाई है
 सुख सपने परछाई है 
सपना एक कुंवारा  सा 
जीवन दर्द दुलारा सा

जल निर्मल कोमल हो मन 
परिवर्तन जीवन का धन 
 सूरज के उजियारा सा 
जीवन  सबसे प्यारा सा


2 टिप्‍पणियां:

देखा दुखियों का क्रंदन है

यह कैसा होता बंधन हैं  ये होता कैसा नन्दन है  ये भाव अनोखे भरे भरे  ये रिश्ते होते खरे खरे  शब्दों के मोती झरे झरे  इन आँखो में अभिनन्दन है ...