शनिवार, 9 अगस्त 2025

आई याद मां की


 

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तो कभी वह घी रहे हैं

वे कभी अमृत रहे हैं  तो कभी वह घी रहे हैं  जब कथायें न सुहाती  तो व्यथा को जी रहे है  है. जहां से सूर आया  गीत और संगीत पाया  गीत और संगीत स...