शनिवार, 9 अगस्त 2025

आई याद मां की


 

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नर्म कोमल सी हथेली

झर गई बारिश से कलियाँ  पत्तिया बूँदों  ने धोई  है यहा अधरों पे खुशियां  क्या कर गया श्रृंगार कोई  डालियों  पर फूल अटके  शूल भी आँखों को खटके...