सोमवार, 29 दिसंबर 2014

उम्मीदे कुछ और है

मार्ग में संघर्ष है
 संघर्ष के कई दौर है 
संघर्ष में उत्कर्ष है 
उत्कर्ष का नहीं छोर है 
राह में कांटे बिछाये
 मुश्किलें कितनी भी आये 
मौत भी न जीत पाये 
उम्मीदे कुछ और है 

हर खुशी दुःख से बड़ी है
मुश्किलो से वह लड़ी है 
लौट आओ उम्मीदे तुम 
मंजिले चौखट खड़ी  है 
आज के भीतर रहा कल 
अंकुरित बीज फिर बना फल 
हर प्रतीक्षा है परीक्षा 
यहाँ परीक्षा की झड़ी  है

1 टिप्पणी:

ईश्वर वह ओंकार

जिसने तिरस्कार सहा  किया है विष का पान  जीवन के कई अर्थ बुने  उसका  हो सम्मान कुदरत में है भेद नहीं  कुदरत में न छेद कुदरत देती रोज दया कुदर...