शुक्रवार, 15 मई 2026

पर कुछ न कुछ तो लोच है



 अब  यहां  उत्तर  भटकते 
और  खटकती सोच  है 
पंख  फैले  पंछीयो  के 
 दिख  रही  यहां  चोंच  है 

अब  हमें  परछाईयों  
गहराइयों  को  जानना  है 
रास्ते  में क्यों उखड़ती
 हर  श्वास  को  पहचानना  है 
प्रश्न  शाश्वत  है पुराने  
पर  नवीनतम  खोज  है 


हो गई  भयभीत  लताएँ 
चिड़िया  न गीत  गाये 
चिट्ठियां  आती  नहीं  अब 
दिल  की  बातें  जो  बताए 
न कभी  स्वीकारते  वे  
पर  कुछ न कुछ तो लोच  है 

शुक्रवार, 8 मई 2026

ठहरी हुई टहनी है


व्यथा  की  कथायें 
 बहुत  कुछ  कहनी है 
ठहरे  हुये  पल 
 ठहरी  हुई    टहनी है
क्रीड़ा  में  पीड़ा  है
  पीड़ा  में  क्रीड़ा  है 
मौसम  की  गर्मी  ही
  आज हमें  सहनी  है 

मंगलवार, 5 मई 2026

तो कभी वह घी रहे हैं


वे कभी अमृत रहे हैं
 तो कभी वह घी रहे हैं 
जब कथायें न सुहाती 
तो व्यथा को जी रहे है 
है. जहां से सूर आया 
गीत और संगीत पाया
 गीत और संगीत सरगम 
ज़ख्म हर गम सी रहे है

पर कुछ न कुछ तो लोच है

  अब  यहां  उत्तर  भटकते  और  खटकती सोच  है  पंख  फैले  पंछीयो  के   दिख  रही  यहां  चोंच  है  अब  हमें  परछाईयों   गहराइयों  को  जानना  है ...