मंगलवार, 5 मई 2026

तो कभी वह घी रहे हैं


वे कभी अमृत रहे हैं
 तो कभी वह घी रहे हैं 
जब कथायें न सुहाती 
तो व्यथा को जी रहे है 
है. जहां से सूर आया 
गीत और संगीत पाया
 गीत और संगीत सरगम 
ज़ख्म हर गम सी रहे है

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