यहां पर आयेगा
यह मयूरा वन के भीतर
इस तरह हर्षायेगा
जिंदगानी लेगी करवट
लौट जायेगी जवानी
पानी पानी हर समस्या
याद न आएगी नानी
झूम कर आयेगा सावन
और पपीहा गाएगा
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...