मंगलवार, 20 जनवरी 2026

और पपीहा गाएगा



है अंधेरा तो उजाला भी 
यहां पर आयेगा
यह मयूरा वन के भीतर 
इस तरह हर्षायेगा 
जिंदगानी लेगी करवट 
लौट जायेगी जवानी 
पानी पानी हर समस्या
 याद न आएगी नानी 
झूम कर आयेगा सावन 
और पपीहा गाएगा 

वो नदी है

नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है  टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई  वो है नेकी न बदी है  दिन होती रात ह...