यहां पर आयेगा
यह मयूरा वन के भीतर
इस तरह हर्षायेगा
जिंदगानी लेगी करवट
लौट जायेगी जवानी
पानी पानी हर समस्या
याद न आएगी नानी
झूम कर आयेगा सावन
और पपीहा गाएगा
थोडी थोड़ी गल रही है थोड़ी थोड़ी जल रही है है पुरानी वेदनाये गीत में जो ढल रही है जो हमारे हित में थीं जो तुम्हारी...
आपकी ये पंक्तियाँ पढ़कर मन में तुरंत उम्मीद की भावना जागती है। आपने अंधेरे के बाद उजाले की बात बहुत सुंदर तरीके से कही। मुझे ऐसा लगा जैसे आप मुश्किल समय में भी हौसला बनाए रखने की बात कर रहे हैं।
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