गुरुवार, 2 जुलाई 2026

छन्द को जीवन तो दे दो

छन्द को जीवन तो दे दो
 ज़िंदगी गाती नही है 
गीत कोई मर रहा हैं 
गीत का साथी नही है 
है अधूरे और पुराने 
गीत हृदय में लिखे है
 पंखुड़ी से प्रीत करते
 भ्रमर भी गुंजित दिखे है 
वो नही होती है कविता 
जो होंठ पर आती नही है 

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