जीवन में गौरव और होता स्वाभिमान है
कठिनाइया कितनी भी जीत जाता ईमान है
व्यक्तित्व में ऊंचाइयां उसने यहाँ पाई है
निकलता है सूरज सा झुक जाता आसमान है
जीवन में गौरव है सौरभ है छाया है
खुशियों की दुनिया है प्रियतम को पाया है
मस्ती की कश्ती है सपनो की बस्ती है
सब कुछ है अपनों में सपनो को पाया है
सोमवार, 12 मार्च 2018
झुक जाता आसमान है
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
वो नदी है
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
-
यह कैसा होता बंधन हैं ये होता कैसा नन्दन है ये भाव अनोखे भरे भरे ये रिश्ते होते खरे खरे शब्दों के मोती झरे झरे इन आँखो में अभिनन्दन है ...
-
जिव्हा खोली कविता बोली कानो में मिश्री है घोली जीवन का सूनापन हरती भाव भरी शब्दो की टोली प्यार भरी भाषाए बोले जो भी मन...
-
यहाँ शब्द नहीं अनुभूति है अनुभव से सब कुछ पाया है अनुभूति जितनी गहरी हो ठहरी उतनी ही काया है जब घना अँधेरा छाता है चिंतन ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें