शनिवार, 18 जनवरी 2025

उनके रहे विचार

पिता जी ने कहा नहीं 
हृदय का कोई दुख
वे तो सबको बाँट गए
जीवन का हर सुख

पिता जी चुपचाप रहे 
पिता जी है मौन 
जीते जी आदर्श रखे
जीवन का हर कोण

पिता जी कोई देह नहीं
है वैचारिक तार
दैहिक थे जो चले गए
उनके रहे विचार

पिता जी परमार्थ रखे
पिता है यथार्थ
वे तो मेरे प्रिय सखे 
मैं हूं केवल पार्थ


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जब चेतना होती मीरा है

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