शनिवार, 18 जनवरी 2025

उनके रहे विचार

पिता जी ने कहा नहीं 
हृदय का कोई दुख
वे तो सबको बाँट गए
जीवन का हर सुख

पिता जी चुपचाप रहे 
पिता जी है मौन 
जीते जी आदर्श रखे
जीवन का हर कोण

पिता जी कोई देह नहीं
है वैचारिक तार
दैहिक थे जो चले गए
उनके रहे विचार

पिता जी परमार्थ रखे
पिता है यथार्थ
वे तो मेरे प्रिय सखे 
मैं हूं केवल पार्थ


5 टिप्‍पणियां:

हँसते हँसते मिट जाते हैं

अब भाव नही होते दर्पण  जो आँखो से दिख जाते है  न रही  चेतना चिन्गारी  अब कलमकार बिक जाते है  कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा  तलवे सत्ता के चाट रहा...