समय बदल रहा,लोग भी पहले जैसे कहाँ है अब।सारगर्भित अभिव्यक्ति।सादर।-----जी नमस्ते,आपकी लिखी रचना मंगलवार ३१ दिसम्बर २०२४ के लिए साझा की गयी हैपांच लिंकों का आनंद पर...आप भी सादर आमंत्रित हैं।सादरधन्यवाद।
वाह
मार्मिक रचना
वाह!!!
अब भाव नही होते दर्पण जो आँखो से दिख जाते है न रही चेतना चिन्गारी अब कलमकार बिक जाते है कोई स्वार्थ साथ आबाद रहा तलवे सत्ता के चाट रहा...
समय बदल रहा,लोग भी पहले जैसे कहाँ है अब।
जवाब देंहटाएंसारगर्भित अभिव्यक्ति।
सादर।
-----
जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३१ दिसम्बर २०२४ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
वाह
जवाब देंहटाएंमार्मिक रचना
जवाब देंहटाएंवाह!!!
जवाब देंहटाएं