पत्तिया बूँदों ने धोई
है यहा अधरों पे खुशियां
क्या कर गया श्रृंगार कोई
डालियों पर फूल अटके
शूल भी आँखों को खटके
नर्म कोमल सी हथेली
टहनियो को यहा चुभोई
इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की अमर धरोहर मालवा की धरती केवल कृषि, व्यापार और वीरता की भूमि नहीं रही, बल्कि यह भारत की उन प्राचीन सा...
सुंदर सृजन, वर्तनी का ध्यान रखें
जवाब देंहटाएंबेहतरीन
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