थोड़ी थोड़ी जल रही है
है पुरानी वेदनाये
गीत में जो ढल रही है
जो हमारे हित में थीं
जो तुम्हारी प्रीत में थी
बात ऐसी तुम बताओ
बात ऐसी हम बताये
वो तुम्हारी और हमारी
ज़िंदगी का कल रही है
इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की अमर धरोहर मालवा की धरती केवल कृषि, व्यापार और वीरता की भूमि नहीं रही, बल्कि यह भारत की उन प्राचीन सा...