आसमान अरमानो का फैला हुआ अनंत
पीट रहे है क्रूर हाथ संवेदना के ढोल
सहानुभूति के नाम पर करते रहे मखौल !!१!!
दुष्ट शकुनी संग रहे कलयुगी अर्जुन
कर्मक्षेत्र के दंद्व में जीत गए अवगुण !!२!!
आंसू पिए द्रुपद सुता खुले केश है शेष
,अपमानों के बोझ तले धोती है अवशेष !!३!!
थोड़े गम है खुशिया कम ,प्रश्न खड़े ज्वलंत
आसमान अरमानो का फैला हुआ अनंत !!4!!
लोकतंत्र की आड़ में भीड़ -तंत्र का खेल
बूथ केप्चरिंग जो करे नहीं गए वो जेल !!9!!
महंगाई तो खूब बड़ी मूल्य-नियंत्रण फेल
बने चुनावी शस्त्र अब चावल शक्कर तेल !!10!!
राजनीति व्यापार नहीं कह गए है शेषन
नए चुनाव सुधार से नेता को टेंशन !!11!!
राजनीति से लुप्त हुई अब नीती की बात
सत्ता के संघर्ष में हुए घात -प्रतिघात !!12!!
गुटबाजी के खेल में निर्दलीय है मस्त
परिणाम जब पता लगा हुई जमानत जब्त !!१3!!
शनिवार, 4 जून 2011
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वो नदी है
नापती खुद को नदी हैं सौपती खुद को सदी है टिमटिमाती रोशनी सी झोंपड़ी से वो बँधी हैं मन को भायी वो सुहाई वो है नेकी न बदी है दिन होती रात ह...
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